क्षेत्रीय
21-Apr-2026
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इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला व जस्टिस आलोक अवस्थी की युगल पीठ के समक्ष इन्दौर शहर में यातायात की गंभीर समस्याओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई दौरान कलेक्टर इंदौर शिवम वर्मा निगमायुक्त क्षितिज सिंथाल, डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी व अन्य अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कोर्ट की लगातार मानीटरिंग के चलते अंततः बीआरटीएस कारिडोर पूरी तरह से हट गया है और सभी बस स्टाप हटा दिए गए हैं। इस दौरान शहर में वीवीआईपी और वीआईपी ड्यूटी के लिए सजग रहने वाली ट्रैफिक पुलिस को लेकर भी चर्चा हुई। राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका में सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया व सहयोगी एडवोकेट शिरीन सिलावट ने कोर्ट को कहा कि ट्रैफिक को लेकर हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रैफिक सिपाही चौराहों पर नहीं रहते और उनका कोने में खड़े होकर चालान बनाने में अधिक जोर होता है। अभी भी 24 घंटे ट्रैफिक सिग्नल चालू नहीं रहते। जिस पर कोर्ट बेंच ने भी कहा कि वे यू टर्न लेकर हाई कोर्ट की ओर आते हैं तब ट्रैफिक सिपाही नहीं दिखते। दो पहिया वाहन इधर-उधर से घुसते हैं और इससे एक्सीडेंट की आशंका बनी रहती है। इस पर बागड़िया ने सवाल उठाया कि जब वीवीआईपी, वीआईपी मूवमेंट होता है तो ट्रैफिक रोक दिया जाता है। बाद में ट्रैफिक जवान वीवीआईपी निकलते ही गायब हो जाते हैं। इस पर कोर्ट ने ट्रैफिक डीसीपी से पूछा कि किन लोगों को जीरो ट्रैफिक की सुविधा है। इस पर बताया गया कि ऐसा कोई नियम नहीं है। केवल सुरक्षा कारणों से ही ट्रैफिक मैनेज करते हैं वह भी एक मिनट के लिए। हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन एवं सीनियर एडवोकेट विनय झेलावत ने कोर्ट को बताया कि इंदौर में अभी स्वीकृत ट्रैफिक पुलिस बल की तुलना में 237 का बल कम है। इस पर हाई कोर्ट ने मप्र शासन और डीजीपी को इस बल को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। सुनवाई दौरान ट्रैफिक डीसीपी ने दावा किया कि चौराहे चिन्हित कर ट्रैफिक बल लगाया गया है। यह पीक आवर्स में मुख्य तौर पर रहते हैं। इस पर सीनियर एडवोकेट बागड़िया ने कहा कि आप मेरे साथ बिना किसी को बताए कार से शहर घूमें। आपको असलियत पता चल जाएगी, पुलिस रहती ही नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने यह कहते कि जो निर्देश पूर्व में दिए गए हैं इस पर काम हो और अगली सुनवाई में कमेटी रिपोर्ट दे अगली तारीख 7 मई नियत कर दी। आनंद पुरोहित/ 21 अप्रैल 2026