राज्य
21-Apr-2026


जबलपुर के दो निजी स्कूलों को अंतरिम आदेश - स्पेशल दिव्यांग बच्चों को संस्था से न निकालें : डीईओ से रिपोर्ट तलब जबलपुर, (ईएमएस)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की संयुक्तपीठ ने एक मामले में सुनवाई करते हुए अपने अंतरिम आदेश के तहत दिव्यांग (स्पेशल) बच्चों के अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए जबलपुर के 2 निजी स्कूलों द्वारा ऐसे छात्रों को निकाले जाने पर तत्काल रोक लगा दी है। सोमवार को जारी अपने अंतरिम आदेश में संयुक्तपीठ ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि विशेष बच्चों के साथ भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उक्त आदेश विशेष रूप से जबलपुर के विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल के खिलाफ सामने आई शिकायतों के बाद दिया गया है, आरोप था कि दोनों स्कूलो से स्पेशल बच्चों को निकाला जा रहा है। उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पेशल बच्चों को निकाले जाने पर तत्काल रोक लगाने के साथ ही उक्त आदेश के पालन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को सौंपते हुए जबलपुर के सभी स्कूलों में पढ़ रहे विशेष बच्चों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले में अगली सुनवाई 29 अप्रैल को निर्धारित की गई है। जबलपुर नगर के सौरभ सुबैया की ओर से दायर जनहित याचिका में उल्लेख किया गया है कि जबलपुर में लगभग 50 सरकारी और 200 निजी स्कूल संचालित हैं। यहां पढ रहे कई छात्र सुनने और बोलने में अक्षम (दिव्यांग) हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि कानून के बावजूद इनमें से अधिकांश स्कूलों में ऐसे बच्चो को पढाने विशेष शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 जैसे कानूनों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा, जो पूरी तरह अवैधानिक है। मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेन्द्र पाण्डेय ने संयुक्तपीठ को अवगत कराया कि दो निजी स्कूलों द्वारा स्पेशल बच्चों को बाहर किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस पर न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत हस्तक्षेप कर उक्त आदेश जारी किया। अजय पाठक / मोनिका / 21 अप्रैल 2026/ 02.41