-एनएचएआई से एग्रीमेंट कर बिना लागत के अपने खेतों में बनवाए तालाब भोपाल,(ईएएमस)। भोपाल से रायसेन, विदिशा, सागर फोरलेन चौड़ीकरण किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। हाइवे किनारे के करीब 250 किसानों ने एनएचएआई से लीगल एग्रीमेंट करके बिना लागत के अपने खेतों में तालाब बनवा लिए हैं। खेत-तालाब बनवाने में किसान को 2 से 5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यहां बिना लागत में तालाब बन रहे हैं। हाइवे किनारे के खेतों से मिट्टी, मुरम मिलने से एनएचएआई की परिवहन लागत कम हुई और निर्माण में तेजी आई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विदिशा-सागर रोड किनारे 250 मिनी डैम जैसे बन गए हैं। इससे करीब 22 हजार बीघा जमीन सिंचित होगी। भोपाल-कानपुर इकोनॉमी कॉरिडोर केवल गाड़ियां ही नहीं दौड़ाएगा, बल्कि विदिशा के किसानों की सूखी तकदीर में पानी भी भरेगा। रिपोर्ट के मुताबिक हाइवे चौड़ीकरण में खेत तालाब बनाने संबंधित किसानों से लिखित सहमति लेते हैं। लीगल एग्रीमेंट करते हैं। राजस्व विभाग की देखरेख में जमीन का सीमांकन करते हैं। यह भी देखते हैं कि कहीं चरनोई भूमि, सरकारी जमीन और माइनिंग तो नहीं है। इसके बाद ही वहां से मिट्टी निकलवाते हैं। तालाब बनने पर जल स्तर बढ़ेगा और पैदावार में भी इजाफा होगा। सिद्धांत सिंघई, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई, विदिशा सुआखेड़ी के एक किसान ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में हाइवे किनारे तालाब बनवाया है। वहीं बेतवा का पानी सूखने पर भी करीब 50 एकड़ में सिंचाई होगी। अब 2 से ज्यादा फसलें ले सकेंगे। इसी तरह अन्य किसानों ने खेत तालाब बनवाए हैं। बता दें महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त बुलढाणा जिले में जल संकट से निपटने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक अनूठा प्रयोग किया था, जिसे अब बुलढाणा पैटर्न के नाम से जाना जाता है। नेशनल हाईवे निर्माण के लिए भारी मात्रा में मिट्टी और मुरम की जरूरत होती है। इस पैटर्न के तहत ठेकेदार ने पास के गांवों के प्राचीन तालाबों और नालों से गाद और मिट्टी निकाली। मिट्टी मिलने से हाईवे की निर्माण लागत करोड़ों रुपए कम हो गई। दूसरी ओर गाद निकलने से तालाब गहरे हो गए और उनकी जल भंडारण क्षमता कई गुना बढ़ गई। नीति आयोग ने भी इस मॉडल की सराहना की है। सिराज/ईएमएस 21अप्रैल26