राज्य
21-Apr-2026


रीवा का सिरमौर बार एसोसिएशन चुनाव विवाद : अदालत में खुली मतदान पेटी, की गई मतों की गिनती जबलपुर, (ईएमएस)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने रीवा जिले के सिरमौर बार एसोसिएशन के चुनाव में उपाध्यक्ष और ग्रंथपाल पद के परिणामों को लेकर दायर मामले में सुनवाई के बाद उक्त चुनाव से संबंधित बैलेट बॉक्स को मंगवाकर अपने समक्ष खुलवाया और वोटों की दोबारा गिनती कराई। सुनवाई के दौरान सामने आई अनियमितताओं पर न्यायालय ने कहा कि इस विवाद का समाधान रिट याचिका के जरिए संभव नहीं है—इसके लिए विधिवत चुनाव याचिका दायर करनी होगी। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की संयुक्तपीठ ने सुनवाई के दौरान सोमवार को जब बैलेट बॉक्स की स्थिति देखी तो कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। न्यायालय ने जहां मतदान पेटी की सील टूटी हुई पाई गई वहीं उसमें रखे मतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी सामने आई। उक्त चुनाव के लिए नियुक्त सहायक चुनाव अधिकारी राजेश पाण्डेय ने स्वयं न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि बॉक्स को मतदान के बाद विधिवत सील किया गया था, लेकिन पेश किए गए बॉक्स में सील टूटी हुई थी और कागज भी फटा हुआ है। यह सीधे तौर पर प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्तपीठ ने रजिस्ट्रार आशीष तिवारी को मतों की गिनती करने के निर्देश दिए। भोजनावकाश के बाद न्यायालय में पेश की गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि चुनाव अधिकारी द्वारा बताए गए आंकड़ों और रजिस्ट्रार की गिनती में अंतर पाया गया। इस अंतर ने पूरे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले में एक विकल्प यह भी रखा कि यदि सभी पक्ष सहमत हों तो नए सिरे से चुनाव कराया जा सकता है लेकिन चार में से तीन उम्मीदवार तो तैयार थे जबकि एक उम्मीदवार की अनुपस्थिति के कारण सर्वसम्मति नहीं बन पाई।किइस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संयुक्तपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सभी उम्मीदवारों की सहमति के बिना पुनर्मतदान संभव नहीं है। उक्त याचिका उपाध्यक्ष पद के निर्वाचित प्रत्याशी मणिकामना प्रसाद पाण्डेय और ग्रंथपाल पद के सतीश कुमार मिश्रा की ओर से दायर की गई थी। उनका आरोप था कि 9 मई 2025 को हुए चुनाव में जीत के बावजूद उन्हें पदभार नहीं सौंपा गया। हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह के विवाद, जिनमें साक्ष्य और तथ्यों की विस्तृत जांच जरूरी हो, उन्हें रिट याचिका के तहत नहीं सुलझाया जा सकता। इसके लिए उचित मंच चुनाव याचिका है, जहां विस्तार से साक्ष्यों की जांच हो सके। अजय पाठक / मोनिका / 21 अप्रैल 2026/ 02.42