- पेयजल आपूर्ति प्रभावित कोरबा (ईएमएस) कोरबा अंचल में दर्री बैराज का पानी एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में आ गया है। जानकारी के अनुसार एसटीपीएस के झाबू राखड़ बाँध फूटने से लाखों टन राख बैराज में समा गई, जिससे जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। हालात संभालने के लिए बैराज का एक गेट खोलकर राखयुक्त पानी नदी में बहाना पड़ा। देर रात भी गेट खोला गया था। पानी में टर्बिडिटी (गंदगी का स्तर) 28 प्रतिशत तक पहुंचने के कारण शहर की पेयजल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्पादन कंपनी के मुख्य अभियंता को जांच के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, पर्यावरण विभाग की टीम ने घटना के दूसरे दिन मौके का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उल्लेखनीय हैं की इससे पहले 2 मार्च को भी झाबू राखड़ बाँध फूटने पर दो गेट खोलकर 43 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था। उस समय सिंचाई विभाग ने उत्पादन कंपनी प्रबंधन पर 18 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। लगातार दूसरी बार बांड फूटने की घटना ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाँध टूटने के दौरान एक बड़ा हादसा भी हुआ, जिसमें जेसीबी वाहन चालक बह गया। बाद में उसका शव वाहन के नीचे दबा मिला। बताया जा रहा है कि झाबू राखड़ बाँध लगभग 12 वर्ष पुराना है और हर वर्ष इसके रखरखाव का ठेका दिया जाता है। वर्तमान में भी यह जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई है। इसके बावजूद बार-बार बाँध फूटने की घटनाएं लापरवाही की ओर इशारा कर रही हैं। प्रशासनिक जांच में भी लापरवाही सामने आई है। पूर्व घटना में कार्यपालन अभियंता और सहायक अभियंता को निलंबित किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच दो मुख्य अभियंताओं द्वारा की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। दर्री बैराज के कार्यपालन अभियंता एस.एन. साय के अनुसार, बैराज का जलस्तर सामान्यतः 941 मीटर बनाए रखा जाता है। इससे कम होने पर संयंत्र तक पानी नहीं पहुंच पाता, जबकि अधिक होने पर गेट खोलकर पानी छोड़ा जाता है। राख को बहाने के लिए एक गेट को लगभग 6 इंच तक खोला गया। साथ ही, बांगो बाँध से अतिरिक्त पानी की मांग की गई, ताकि 10 से 11 घंटे तक पानी छोड़ा जा सके और जलस्तर संतुलित बना रहे। - 21 अप्रैल / मित्तल