क्षेत्रीय
21-Apr-2026
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- राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का मामला - कॉग्रेंस ने किया कड़ा विरोध, कहा न डरेंगे, न झुकेंगे - एमपी पुलिस की इस कार्रवाई से आश्चर्य और निराशा हुई- विवेक तन्खा भोपाल(ईएमएस)। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर राजस्थान पुलिस ने एमपी कांग्रेस आईटी सेल के 3 कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में लिया हैं। इनमें निखिल, बिलाल और इनाम के नाम शामिल हैं। यह जानकारी कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने फेसबुक के माध्यम से दी है। उनका यह भी कहना है की पुलिस ने शुरू में कांग्रेस आईटी सेल के 7 कार्यकर्ताओं को उठाया था, लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया। इसके बाद तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखा गया है। जिन्हें 30 घंटे से ज्यादा हो गए। साइबर पुलिस ने कार्यकर्ताओं को बिना किसी उचित कारण के हिरासत में रखा है। उन्होंने सीएम और डीजीपी को टैग करते हुए कहा कि एमपी पुलिस की इस कार्रवाई से उन्हें आश्चर्य और निराशा हुई है। तन्खा ने आगे लिखा- वसुंधरा राजे की तथाकथित ट्वीट, जिसे लाखों लोगों ने देखा और साझा किया। 15-16 अप्रैल से सार्वजनिक रूप से प्रसारित हो रही थी। बाद में 18 अप्रैल को शाम लगभग 8 बजे इसे फर्जी पत्र बताया गया। ऐसे में इस आधार पर हिरासत में लेना उचित नहीं है। - राजस्थान लेकर जाएगी पुलिस कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक का कहना है की हिरासत में लिये गये कार्यकर्ताओं के परिजन उनके साथ हैं। राजस्थान पुलिस उन्हें अपने साथ ले जाने की तैयारी में है। वह स्वयं पुलिस कमिश्नर के पास गए थे। उनके अनुसार, डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि राजस्थान पुलिस इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं कर रही है। - क्या है पूर्व सीएम के कथित वायरल लेटर में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल कथित पत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि एक ओर महिला आरक्षण लागू करने की बात हो रही है। वहीं दूसरी ओर इसे परिसीमन से जोड़ने का प्रयास संदेह पैदा करता है। इसमें पूछा गया है कि अगर नीयत साफ है, तो आरक्षण सीधे और पारदर्शी तरीके से क्यों नहीं दिया जा रहा। पत्र में मोहन भागवत से भी सवाल किया गया है कि इस पूरे मुद्दे पर उनका मौन किस रूप में देखा जाए ? स्वीकृति या वैचारिक असमंजस। साथ ही कहा गया है कि पार्टी की पहचान अब संस्कार और राष्ट्रधर्म से हटकर सत्ता-लोभ और राजनीतिक बदनियत से जुड़ती दिख रही है। इसके अलावा, महिला सम्मान के मुद्दे पर संसद में दिए जाने वाले भाषणों को औपचारिकता और पाखंड बताया गया है, जिसे नैतिक रूप से भी दुखद स्थिति बताया गया है। - न डरेंगे, न झुकेंगे- जीतू पटवारी मामले को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि उन्होंने वसुंधरा राजे का पत्र ध्यान से पढ़ा है। इसमें महिला आरक्षण की आड़ में अवैध परिसीमन के संभावित षड्यंत्र के गंभीर संकेत मिलते हैं। उनके मुताबिक, यह मामला भाजपा के भीतर डर और बौखलाहट को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए तीन कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है। पटवारी ने चुनौती देते हुए कहा कि कार्रवाई करनी है तो उन पर की जाए, कार्यकर्ताओं पर नहीं। वे और पूरी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी है। न डरेंगे, न झुकेंगे। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने कथित पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि वसुंधरा राजे के एक महत्वपूर्ण पत्र ने बीजेपी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। महिला आरक्षण की आड़ में चल रहे पूरे षड्यंत्र को उजागर किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वही पत्र लाखों लोगों ने साझा किया है, तो कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों पर ही क्यों की जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि वसुंधरा राजे ने पहले आवेश में आकर पत्र लिखा और बाद में पार्टी में कार्रवाई की आशंका के चलते उससे पीछे हट गईं। अगर पत्र में लिखी बातें गलत हैं तो सभी पर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। जुनेद / 21 अप्रैल