ज़रा हटके
22-Apr-2026
...


बीजिंग (ईएमएस)। साउथ चाइना सी में चीन ने दुनिया का पहला वाणिज्यिक अंडरवॉटर डेटा सेंटर तैनात किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के भीतर चल रहे ये भारी-भरकम सर्वर ग्लोबल वार्मिंग और समुद्री जीवन के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। चीन के द्वारा हैनान द्वीप के पास बनाए गए इस डेटा सेंटर ने दुनियाभर के पर्यावरण विशेषज्ञों और अमेरिकी अधिकारियों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। इन डेटा सेंटरों से निकलने वाली अत्यधिक गर्मी समुद्र के पानी का तापमान बढ़ा रही है, जिसका सीधा और विनाशकारी असर वियतनाम और फिलीपींस जैसे पड़ोसी देशों के समुद्री संसाधनों पर पड़ सकता है। चीन इस विवादास्पद तकनीक के माध्यम से सस्ते एआई कंप्यूट का सबसे बड़ा सप्लायर बनने की होड़ में लगा है, वह पर्यावरण की कीमत पर अपनी डिजिटल दादागिरी स्थापित करना चाहता है। चीन का यह अंडरवॉटर डेटा सेंटर ‘हाइलान्सिन’ नाम की कंपनी ने तैयार किया है, और यह अब एआई तथा बिग डेटा पर काम करने वाली कंपनियों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। रिपोर्टें बताती हैं कि चीन समुद्र को केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार के तौर पर देख रहा है। एआई के बढ़ते इस्तेमाल से भारी मात्रा में गर्मी पैदा होती है, जिसे ठंडा करने के लिए बहुत ऊर्जा की आवश्यकता होती है। चीन इस पर्यावरणीय नुकसान और गर्मी को चुपचाप समुद्र में छोड़ रहा है। समुद्र को पूरी दुनिया की साझा संपत्ति माना जाता है, लेकिन चीन इसे अपना पर्सनल हीट सिंक बना चुका है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि एआई की दौड़ में आगे निकलने के लिए चीन प्रकृति के साथ गंभीर खिलवाड़ कर रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। एक सामान्य अंडरवॉटर डेटा सेंटर पॉड लगभग 500 किलोवाट से एक मेगावाट तक बिजली की खपत करता है। हाइलांक्सिन की योजना ऐसे 100 पॉड समुद्र के नीचे लगाने की है, जिसका अर्थ है कि वहां कुल 100 मेगावाट तक ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। अगर इतनी बड़ी मात्रा में गर्मी लगातार समुद्र में छोड़ी गई, तो हर सेकंड करोड़ों जूल ऊर्जा पानी में मिलेगी। भले ही चीन उन्नत कूलिंग सिस्टम का दावा करे, लेकिन इतनी गर्मी आसपास के पानी का तापमान कुछ ही घंटों में बढ़ा सकती है। इससे समुद्री जीव-जंतुओं, प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) और पूरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचना तय है, जिससे जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। हाइलान्सिन कंपनी का पिछला रिकॉर्ड भी काफी विवादों भरा रहा है। यह कंपनी पहले चीनी नौसेना के लिए स्मार्ट शिप सिस्टम और समुद्र के नक्शे तैयार करती थी। साल 2022 में अमेरिका ने इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। आरोप था कि इसने अमेरिकी तकनीक चुराकर ऐसे सिस्टम बनाए जो युद्ध में मदद करते हैं। इसकी मदद से रूस को यूक्रेन के तट के पास पनडुब्बियों और युद्धपोतों पर नजर रखने में सहायता मिली थी। अब यही कंपनी डेटा सेंटर के नाम पर समुद्र में अपनी पैठ बढ़ा रही है, जिससे पड़ोसी देशों को जासूसी और डेटा चोरी का डर भी सता रहा है। चीन के ये डेटा सेंटर फिलहाल उसके अपने तटीय इलाकों में हैं, लेकिन समुद्र का पानी एक जगह स्थिर नहीं रहता है। इसमें छोड़ी गई गर्मी धीरे-धीरे पूरे समुद्री सिस्टम में फैल जाती है। वियतनाम और फिलीपींस जैसे देश अपनी अर्थव्यवस्था के लिए समुद्र पर बहुत अधिक निर्भर हैं। चीन के इस प्रोजेक्ट से उनके हिस्से के समुद्री क्षेत्र में मछलियों की कमी हो सकती है और उनकी आजीविका पर असर पड़ सकता है। हाइलांक्सिन का दावा है कि तापमान सिर्फ दो डिग्री ही बढ़ेगा, लेकिन विशेषज्ञ इसे खतरे की घंटी मान रहे हैं। चीन पहले भी दुर्लभ खनिजों के नाम पर हजारों झीलें और जमीन बर्बाद कर चुका है। चीन आने वाले समय में पूरी दुनिया को बहुत सस्ती एआई सेवाएं बेचने की तैयारी में है। वह अंडरवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से अपनी लागत कम कर रहा है। सुदामा/ईएमएस 22 अप्रैल 2026