22-Apr-2026
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-अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने कहा- अब भी ईरान के पास है 70 फीसदी ताकत तेहरान,(ईएमएस)। ईरान के संसद प्रमुख मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने हालिया बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ट्रंप युद्ध विराम का उल्लंघन और घेराबंदी कर बातचीत की मेज को समर्पण की मेज में बदलना चाहते हैं या फिर नई जंग का बहाना ढूंढ रहे हैं। कालिबाफ ने चेतावनी दी कि हम धमकियों की छाया में बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे। पिछले दो हफ्तों में हमने युद्धक्षेत्र पर नए कार्ड दिखाने की पूरी तैयारी कर ली है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी यही रुख दोहराया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध विराम की स्थिति बेहद नाजुक है। दोनों पक्षों के बीच दो हफ्ते का युद्ध विराम खत्म होने वाला है, लेकिन भविष्य को लेकर कोई साफ तस्वीर नहीं दिख रही है। पाकिस्तान में दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। ट्रंप ने कहा है कि युद्ध विराम बुधवार शाम को खत्म हो जाएगा और इसे बढ़ाने की संभावना बहुत कम है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारियों का अनुमान है कि कई हफ्तों के युद्ध के बावजूद ईरान के पास अब भी ड्रोन के 40 फीसदी और मिसाइल लॉन्चरों के 60 फीसदी से ज्यादा स्टॉक है। युद्ध विराम के बाद उसने बंकरों और गुफाओं से 100 से ज्यादा लॉन्चर निकाल लिए हैं। कुछ अनुमानों के मुताबिक रिकवरी पूरी होने पर यह आंकड़ा 70 फीसदी तक पहुंच सकता है। यह क्षमता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित करने के लिए काफी मानी जा रही है। ईरान की ताकत का सबसे बड़ा आधार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स हैं। कालिबाफ ने कहा कि अगर अमेरिका ने सबसे छोटी गलती भी की तो ईरान मुंहतोड़ जवाब देगा। आईआरजीसी ने पहले भी अपनी क्षमता की झलक दिखाई है। राज्य मीडिया ने कई बार वीडियो जारी किए हैं जिसमें विशाल अंडरग्राउंड फैसिलिटीज दिखाई गई हैं। जहां सुरंगों में सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें एक कतार में खड़ी दिखी हैं। ट्रक इन सुरंगों से निकलकर हथियार ले जाते दिखे हैं। ये सुविधाएं पहाड़ों के नीचे बनी हैं, जो हवाई हमलों से काफी हद तक सुरक्षित हैं। ईरान सस्ते शाहिद-136 जैसे ड्रोन का बड़े पैमाने पर उत्पादन करता रहा है। ये ऑफ-द-शेल्फ पार्ट्स से बनाए जाते हैं और छोटी वर्कशॉप में भी असेंबल हो सकते हैं। दो सप्ताह के युद्ध विराम में उसने फिर से वह क्षमता हासिल कर ली है। युद्ध में उत्पादन क्षमता को नुकसान पहुंचा था, लेकिन आईआरजीसी की मोबाइल लॉन्चर और छिपे हुए स्टॉक अभी भी मजबूत हैं। अगर बातचीत टूट गई तो आईआरजीसी होर्मुज में मिसाइल-ड्रोन हमलों या माइनिंग से शिपिंग बाधित कर सकता है। 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध में ईरान ने ऐसा किया था। ट्रंप प्रशासन होर्मुज में नौसैनिक घेराबंदी जारी रखना चाहता है और ईरानी जहाजों को रोक रहा है। ईरान की रणनीति साफ है। वह युद्धक्षेत्र पर अपनी बची हुई क्षमता दिखाकर बातचीत में मजबूत स्थिति बनाना चाहता है। अमेरिका के लिए यह नासूर बन सकता है क्योंकि होर्मुज बाधित होने पर वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। आईआरजीसी की अंडरग्राउंड नेटवर्क और मोबाइल क्षमता लंबे समय तक संघर्ष को बनाए रख सकती है। सिराज/ईएमएस 22 अप्रैल 2026