22-Apr-2026
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-अमेरिका ने ऐसा प्रस्ताव दिया जिससे उसकी ईमानदारी पर हो रहे सवाल खड़े वॉशिंगटन,(ईएमएस)। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने अमेरिका के नेवादा के नेलिस एयर फोर्स बेस पर एक बोइंग एफ-15ईएक्स ईगल-2 फाइटर जेट में एक फैमिलियराइजेशन सॉर्टी उड़ान भरी। इसके बाद से ही चर्चा की जा रही है कि क्या भारत राफेल के अलावा अमेरिकी फाइटर जेट में भी दिलचस्पी दिखा रहा है। राफेल सौदा 35 से 40 अरब डॉलर के बीच होने की संभावना है लेकिन सोर्स कोड को लेकर पेंच फंसा है। फ्रांस राफेल का सोर्स कोड शेयर करने से इनकार कर रहा है जबकि भारत हर हाल में मेक इन इंडिया के तहत विमानों का निर्माण चाहता है ताकि किसी और देश पर निर्भरता ना रहे और घरेलू उद्योग को फायदा पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत और अमेरिकी वायुसेना के अधिकारी नियमित तौर पर एक दूसरे देश का दौरा करते रहते हैं जिसका मकसद एक मजबूत संबंध बनाना होता है। इस दौरान इंटरऑपरेबिलिटी, संयुक्त प्रशिक्षण, इंडो-पैसिफिक में साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं और आधुनिकीकरण पर चर्चा होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट विजयेन्द्र के ठाकुर ने लिखा कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के दौरे का मकसद शायद अमेरिकी विमानों को लेकर भारतीय वायुसेना विरोध में नहीं है ये दिखाना हो सकता है। उन्होंने कहा है कि भारत की एमएमआरसीए खरीद प्रक्रिया में अमेरिका ने भारतीय वायुसेना के सामने अपने एफ-16 और एफ-18 लड़ाकू विमानों का प्रस्ताव रखा था लेकिन आईएएफ ने राफेल खरीदने का फैसला किया। हालांकि भारत ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर मतभेद की वजह से राफेल को लेकर एमएमआरसीए सौदा नहीं किया और अंत में 2018 में 36 राफेल सौदा किया गया। एमएमआरसीए प्रोग्राम को बंद करने के बाद भारत ने मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम शुरू किया और अमेरिकी एफ-15ईएक्स लड़ाकू विमान इसमें काफी बाद में शामिल हुआ था। नई दिल्ली ने सबसे पहले अक्टूबर 2020 में एफ-15ईएक्स में अपनी दिलचस्पी दिखाई थी। यह उस समय की बात है जब अमेरिकी वायुसेना ने बोइंग को करीब 1.2 अरब डॉलर का एक अनुबंध किया था। इस अनुबंध के तहत बोइंग को 8 एफ-15ईएक्स एडवांस लड़ाकू विमानों का पहला जत्था तैयार करना था ताकि वायुसेना अपनी क्षमता संबंधी जरुरतों को पूरा कर सके और अपने लड़ाकू बेड़े की ताकत में और ज्यादा इजाफा कर सके। वायुसेना राफेल को पहली पसंद बता चुकी है और एफ-15ईएक्स के लिए अमेरिका की नई पेशकश का मकसद राफेल सोर्स कोड को लेकर विवाद का फायदा उठाना हो सकता है। विजयेन्द्र का मानना है कि वायुसेना ऐसे किसी भ्रामक प्रस्ताव को लेकर आगे बढ़ेगी इस बात की संभावना नगण्य है। और ध्यान देने से पता चलता है कि अमेरिका ने ऐसा एक प्रस्ताव दिया है जिससे उसकी ईमानदारी पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने लिखा भारत को स्टील्थ लड़ाकू विमानों की जरूरत है और अमेरिका ने एफ-35 का ऑफर नहीं दिया है। वो जिस एफ-15ईएक्स का ऑफर दे रहा है वो एसयू-30एमकेआई जैसा है और अगर एफ-15ईएक्स खरीदने के साथ साथ उसके मिसाइल खरीदने और पूरा इको सिस्टम बनाने में भारत के अरबों डॉलर खर्च हो जाएंगे। इसके अलावा ईरान ने युद्ध में अमेरिकी एफ-15ईएक्स को मार गिराया है जिससे विमान की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसीलिए ठाकुर का मानना है कि भारतीय वायुसेना इसे नहीं खरीदेगी और उसका ध्यान एसयू-30एमकेआई में एडवांस ब्रह्मोस मिसाइलों के इंटीग्रेशन पर ज्यादा है। भारत खुद का हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल भी बना रहा है और एयरफोर्स का फोकस उसे अपने विमानों से लैश करना है जिसे रोकना दुश्मनों के लिए असंभव होगा। सिराज/ईएमएस 22 अप्रैल 2026