पीएम मोदी ने केदारनाथ के कपाट खुलने की दी शुभकामनाएं व बधाई देहरादून,(ईएमएस)। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के शुरु और बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने इस यात्रा को भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा जगद्गुरु आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और माध्वाचार्य जैसी महान विभूतियों की विरासत को आगे बढ़ाने वाली है। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रेषित अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चारधाम यात्रा शुरु हो गई है। उन्होंने कहा कि चारों धामों की यह यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु माध्वाचार्य ने भी अपने धर्मविचारों को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की थी। ये चारों धाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं। हर साल विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचते हुए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भाव को और सशक्त करते हैं। इस साल की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है। पीएम मोदी कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की अत्यंत अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले, उन्होंने बाबा केदार के द्वार पर खुद ये कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति, तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पिछले कुछ सालों से उत्तराखंड में विकास हो रहा है, उसने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है, जिससे श्रद्धालुओं, संतजनों और पर्यटकों को सुविधा हो रही है। पीएम मोदी ने उत्तराखंड आने वाले अतिथियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखते हुए, उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे उन्हें एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी। उन्होंने पांच संकल्प के बारे में कहा कि धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें। हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहे। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, एक पेड़ मां के नाम जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। पुरातन काल से तीर्थ यात्राएं सर्वजन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें। सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़े। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें। उन्होंने कहा कि अपने मूल स्थान से चलकर घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज की जरूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें। यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा ना हो। पीएम मोदी ने क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स से भी उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। सिराज/ईएमएस 22अप्रैल26 -------------------------------