- कुछ खास सीटों को कब्जाने भाजपा ने बनाया स्पेशल प्लान भोपाल (ईएमएस)। 2028 के विधानसभा चुनाव में भाजपा रिकॉर्ड जीत की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए पार्टी कई स्तरों पर काम कर रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने कांग्रेस का गढ़ बन चुकी विधानसभा सीटों के लिए स्पेशल कलस्टर प्लान बनाया है। इसके तहत विधानसभा क्षेत्र में चार-पांच गांवों का कलस्टर बनाया गया है। फिर इसमें वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और मंत्रियों को तैनात किया जा रहा है। इन लोगों को बूथ स्तर पर बैठक करके मतदाताओं को जागरूक करने से लेकर सोशल मीडिया तक के लिए प्रेरित करने का दायित्व सौंपा जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि भाजपा की राजनीति सत्ता प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि अंत्योदय के विचार को साकार करने के लिए समर्पित है। मिशन 2028 के तहत पार्टी पूरी गंभीरता और रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। जिन बूथों पर भाजपा को विजय मिली है, वहां मत प्रतिशत को और बढ़ाने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। वहीं, जिन बूथों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली, उन्हें जीतना पार्टी का प्रमुख लक्ष्य है। हमारा विश्वास है कि संगठन की शक्ति, कार्यकर्ताओं के परिश्रम और जनता के आशीर्वाद से आने वाले समय में ऐसी कोई भी सीट नहीं होगी, जिसे भाजपा जीत न सके। गौरतलब है कि बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर प्रभावी जाति समूहों एससी-एसटी व अन्य को साधने के लिए नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। मंत्रियों की तैनाती भी इन कठिन सीटों पर की गई है। भाजपा ने इन कठिन सीटों के लिए मिशन-2028 के तहत एक बहुआयामी माइक्रो-प्लानिंग रणनीति तैयार की है। जानकारी के अनुसार भाजपा उन सीटों को भी जीतने के लिए विशेष रणनीति बना रही है, जिन पर जनसंघ के समय से लेकर अब तक वह कम ही जीती है। ऐसी कई सीटों को चिह्नित कर उसने न सिर्फ संगठनात्मक गतिविधियों को अभी से बढ़ा दिया है बल्कि तीन-चार गांवों का कलस्टर बनाकर उनकी जिम्मेदारी दिग्गज नेताओं को दी है। उन्हें हार के कारणों का अध्ययन करने और उन्हें दूर करने के लिए मजबूत रणनीति बनाने को कहा गया है। ये सीटें टारगेट पर स्पेशल कलस्टर प्लान के तहत पार्टी का फोकस ऐसी कई सीटों पर हैं जहां कांग्रेस अपने दिग्गज नेताओं के प्रभाव के कारण मजबूत है। अब उनका किला भी भेदने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। ऐसी सीटों में खरगोन जिले की अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित भगवानपुरा सीट पर कांग्रेस या निर्दलीयों का दबदबा रहा है। धार जिले की कुक्षी सीट भी परंपरागत रूप से कांग्रेस के पक्ष में रही है। यहां से कांग्रेस की आदिवासी नेत्री जमुना देवी लंबे समय तक जीतती रहीं। अब हनी सिंह बघेल कांग्रेस विधायक हैं। खरगोन जिले की अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित भीकनगांव सीट पर भी भाजपा को कभी सफलता नहीं मिली। सीधी जिले की चुरहट सीट भी कांग्रेस का गढ़ रही है। अभी अजय सिंह कांग्रेस के विधायक हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की इस परंपरागत सीट पर वर्ष 1993 और 2018 को छोडकऱ कभी भी भाजपा नहीं जीती। एक बार 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी भी जीती। मुस्लिम बहुल भोपाल उत्तर सीट पर भाजपा सिर्फ 1993 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद के राजनीतिक माहौल में मतों के ध्रुवीकरण के लाभ के चलते जीती। 2018 में फातिमा रसूल सिद्दीकी के रूप में प्रदेश में एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार को उतारकर भी भाजपा सफल न हो सकी। छिंदवाड़ा जिले की चौरई सीट लंबे समय से कांग्रेस, विशेषकर कमल नाथ परिवार के प्रभाव क्षेत्र में रही है। भाजपा के रमेश दुबे यहां के प्रभावशाली नेता रहे हैं, जिन्होंने 2003 और 2013 के विधानसभा चुनावों में यहां से जीत दर्ज की थी। इस जिले की अमरवाड़ा सीट को छोडक़र बाकी सारी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। अमरवाड़ा सीट पर जुलाई 2024 में हुए उपचुनाव में भाजपा के कमलेश प्रताप शाह ने जीत हासिल की। यह जीत भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि अमरवाड़ा में भाजपा 16 साल बाद वापसी करने में सफल रही। इससे पहले भाजपा ने 2008 में यहां जीत दर्ज की थी, तब भी पार्टी ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रेम नारायण ठाकुर को टिकट दिया था। बालाघाट जिले की परसवाड़ा सीट भी ऐसी ही है, जहां से केवल दो बार भाजपा जीती। विनोद / 22 अप्रैल 26