मुम्बई (ईएमएस)। इंडियपन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में युवा क्रिकेटरों ने कई प्रचलित धारणाओं को पीछे छोड़ दिया है। अंशुल कंबोज, प्रिंस यादव और विजयकुमार युवा गेंदबाजों ने दिखाया है कि कैसे राउंड द विकेट गेंदबाजी कर बल्लेबाजों पर कैसे दवाब बनाया जा सकता है। वहीं आम तौर पर माना जाता है कि दायें हाथ के बल्लेबाज को ओवर द विकेट गेंदबाजी की जाती है। इस सत्र में डेथ ओवर्स के दौरान ‘राउंड द विकेट’ आना एक बड़ी रणनीति बनकर उभरा है। राउंड द विकेट के दौरान गेंदबाज एक ऐसा कोण बनता है जिससे कि बल्लेबाज के पास शॉट खेलने के लिए पूरी जगह नहीं बचती है। अगर बल्लेबाज ऑफ-स्टंप की तरफ बढ़ता भी है, तो भी गेंदबाज के पास गेंद को और बाहर की तरफ स्विंग कराने या ‘कटर’ कराकर उसे आउट करने का अवसर रहता है। इसी कौशल का कंबोज, प्रिंस और विजयकुमार ने काफी अच्छा इस्तेमाल किया है। इन गेंदबाजों ने राउंड द विकेट से फेंकी गई सटीक यॉर्कर से बल्लेबाज को खेलने का कोई अवसर नहीं दिया है। इस सत्र के आंकड़े बताते हैं कि डेथ ओवर्स में राउंड द विकेट गेंदबाजी करते समय दाएं हाथ के तेज गेंदबाजों का इकोनॉमी रेट 8.4 रहा है, जबकि ओवर द विकेट यह 10.2 तक जा रहा है। इसका कारण बल्लेबाज की पहुंच को सीमित करना है। जब गेंदबाज राउंड द विकेट आता है, तो वह ‘वाइड यॉर्कर’ और भी सटीक फेंकता है जिससे बल्लेबाज के लिए उस कोण से आती गेंद को डीप मिड-विकेट या लॉन्ग-ऑन पर खेलना मुश्किल हो जाता है। इसका कारण है कि गेंद बल्लेबाज के शरीर से दूर जा रही होती है। वहीं नियमों के अनुसार ऑफ-साइड की वाइड लाइन से बल्लेबाजों के लिए असानी होती है पर राउंड द विकेट गेंदबाजी करते समय, गेंदबाज इस लाइन का बेहतर इस्तेमाल कर बल्लेबाज को घेर लेते हैं। इस सीजन में करीब 35 फीसदी विकेट डेथ ओवर्स में ‘वाइड ऑफ द क्रीज’ जाकर राउंड द विकेट पर मिले हैं. यह दर्शाता है कि गेंदबाज अब बल्लेबाजों को गेंद खेलने के लिए बाहर आने पर मजूबर कर रहे हैं। इससे साफ है कि अब गेंदबाज जान ये हैं कि विकेट केवल रफ्तार से नहीं सही कोण पर गेंद फेंकने से मिलेंगे। गिरजा/ईएमएस 24 अप्रैल 2026