मनोरंजन
26-Apr-2026
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मुंबई (ईएमएस)। अपने किरदार गुलरुख के जरिए अभिनेत्री कृतिका कामरा ने 1960 और 1970 के दशक के मुंबई के फैशन और माहौल को बेहद खूबसूरती से दोबारा जीवंत कर दिया। इस किरदार की तैयारी में कृतिका ने न सिर्फ उस समय की मशहूर फिल्मों और बॉलीवुड सितारों को गहराई से देखा, बल्कि उस दौर की असली जिंदगी, लोगों की स्टाइलिंग और सामाजिक माहौल को भी करीब से समझने की भरपूर कोशिश की। हाल ही में कृतिका कामरा ने अपने इस खास लुक के पीछे की दिलचस्प कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उनके किरदार गुलरुख के लुक को बनाने की शुरुआत एक बेहद खास तस्वीर से हुई थी, जो निर्देशक नागराज सर ने उन्हें दिखाई थी। यह तस्वीर 70 के दशक की मशहूर अभिनेत्री परवीन बॉबी की थी, जिसने उनके लुक के लिए एक प्रारंभिक दिशा तय की। कृतिका ने कहा, इसके बाद हमारी टीम ने जीनत अमान, शर्मिला टैगोर और रेखा जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों के स्टाइल और पर्सनैलिटी को भी करीब से देखा और उनसे प्रेरणा ली। हमारी कॉस्ट्यूम डिजाइनर प्रियंका दुबे ने मेरे साथ कई बार ट्रायल किए, ताकि हर आउटफिट, हर ड्रेस और हर लुक उस समय की असलियत को सही तरह से पर्दे पर दिखा सके और किरदार में जान डाल सके। कृतिका ने आगे बताया कि टीम ने सिर्फ अभिनेत्रियों के स्टाइल तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने उस दौर की असली तस्वीरों और दस्तावेजों को भी बड़ी बारीकी से खंगाला। इसमें उस समय के मशहूर जैज क्लब, रेसिंग इवेंट्स और पारसी इवेंट्स के कार्यक्रमों की तस्वीरें शामिल थीं। इन सब चीजों ने मिलकर यह समझने में बहुत मदद की कि उस समय लोग कैसे रहते थे, कैसे कपड़े पहनते थे और उनका पूरा सामाजिक व सांस्कृतिक माहौल कैसा हुआ करता था। यही वजह है कि गुलरुख का किरदार सिर्फ एक फैशनेबल लुक नहीं, बल्कि एक जीवंत समय और एक युग का एहसास देता है, जो दर्शकों को उस दौर में ले जाता है। कृतिका कामरा ने कहा, मेरे किरदार को गढ़ने में सिर्फ कपड़े या मेकअप ही नहीं, बल्कि हर छोटी से छोटी चीज का भी विशेष ध्यान रखा गया था। हेयरस्टाइल से लेकर जूते और एक्सेसरीज तक, सब कुछ बहुत सोच-समझकर और ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखकर चुना गया। इन्हीं बारीकियों की वजह से मुझे अपने किरदार में पूरी तरह से ढलने और गुलरुख के आत्मविश्वास व उसके स्वभाव को समझने में मदद मिली। मुझे लगता है कि जब तक किरदार का पूरा लुक सही तरीके से तैयार नहीं होता, तब तक उसकी असली भावना और उसकी पहचान को पर्दे पर लाना बेहद मुश्किल होता है। इस तरह कृतिका ने अपने अभिनय के साथ-साथ अपने लुक के जरिए भी मटका किंग में एक यादगार किरदार को जन्म दिया। मालूम हो कि भारतीय ओटीटी और फिल्मों की दुनिया में जब भी किसी पुराने दौर को पर्दे पर दोबारा जीवंत किया जाता है, तो उसके पीछे गहन रिसर्च और बारीकी से किया गया अध्ययन होता है। सुदामा/ईएमएस 26 अप्रैल 2026