इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान में मानवाधिकारों के हनन और बलूच कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का मामला एक बार फिर गरमा गया है। कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की सक्रिय सदस्य फोजिया बलोच की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा की है। फोजिया को उस समय हिरासत में लिया गया जब वे अपने भाई दादशाह बलोच की जबरन गुमशुदगी के खिलाफ कराची प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंची थीं। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने फोजिया को हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। घटना की पृष्ठभूमि फोजिया के भाई दादशाह बलोच से जुड़ी है, जिन्हें कथित तौर पर 21 अप्रैल को सुरक्षा बल उनके घर से उठाकर ले गए थे। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज करने से भी इनकार कर दिया था। जब परिवार ने न्याय के लिए सार्वजनिक मंच का सहारा लेना चाहा, तो फोजिया को भी निशाना बनाया गया। बलूच यकजेहती कमेटी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अवैध बताते हुए मांग की है कि फोजिया और उनके भाई को तुरंत रिहा किया जाए। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वे पाकिस्तान में हो रहे इन मानवाधिकार उल्लंघनों पर संज्ञान लें और सरकार को जवाबदेह ठहराएं। मानवाधिकार विभाग पांक और बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) जैसे संगठनों ने इसे पीड़ित परिवारों की आवाज दबाने की एक सोची-समझी नीति करार दिया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में असहमति और न्याय की मांग करने वालों के लिए लोकतांत्रिक स्थान लगातार कम होता जा रहा है। विशेष रूप से बलूच महिलाओं के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक क्वेटा, कराची और खुजदार जैसे विभिन्न इलाकों से लगभग दो दर्जन बलूच महिलाओं को कथित तौर पर जबरन उठाया गया है। छात्र संगठनों का आरोप है कि प्रशासन इन अपहरणों को एक सामान्य प्रक्रिया बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर बलूचिस्तान में जारी अशांति और वहां के नागरिकों के बुनियादी अधिकारों के हनन की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है। वीरेंद्र/ईएमएस/26अप्रैल2026 ---------------------------------