लेख
27-Apr-2026
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत को नरक कुंड बताकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान ट्रंप का यह बयान आया। इस पर जो प्रतिक्रिया भारत की होनी थी, अभी तक नहीं हुई है। जिस तरह से सोशल मीडिया पर ट्रंप का यह बयान तूल पकड़ रहा है। सोशल मीडिया में जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और हिंदू संगठनों को निशाने पर लिया जा रहा है। उससे आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी और हिंदूवादी संगठनों को जवाब देना मुश्किल हो सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों पागलपन के एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जिसमें वह किसी के बारे में कुछ भी बोल देते हैं। उनकी बोली हुई बातों को दुनिया के देशों में गंभीरता से नहीं लिया जाता है। वह सुबह कुछ और बोलते हैं, शाम को कुछ और बोलने लगते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने टेरिफ को लेकर बार-बार अपने बयान बदले। ईरान युद्ध के दौरान अपने बयानों को बार-बार बदला। वह किसी के ऊपर कोई भी आरोप लगा देते हैं। जिस तरह की छवि डोनाल्ड ट्रंप की दुनिया में बन रही है, उसमें वह अमेरिका के राष्ट्रपति कम, सारी दुनिया के लिए एक गैंगस्टर के रूप में अपनी पहचान बनाते हुए दिख रहे हैं। भारत की संस्कृति लाखों वर्ष पुरानी है। भारत का अध्यात्म और भारत देवताओं की भूमि सारी दुनिया के देशों में अलग पहचान हमेशा से रही है। पृथ्वी में सात द्वीप हैं, उसमें सबसे अच्छा देवताओं वाला जम्मू द्वीप भारत में है। इस पवित्र भूमि को डोनाल्ड ट्रंप ने नरक कुंड बताकर हमारे करोड़ों देवी-देवताओं के साथ-साथ भारतवासियों का भी घोर अपमान किया है। इतने बड़े अपमान के बाद भी भारत के हिंदू सम्राट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार केन्द्र में है, उन्हें सारे हिंदू संगठनों का समर्थन प्राप्त है। इसके बाद भी डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जिस तरह से भारत का बार-बार अपमान किया जा रहा है। वह अब चरम पर पहुंच गया है। भारत में इसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया आम जनमानस के बीच हो रही है। आम जनता के बीच से यह प्रतिध्वनि निकलने लगी है। जब इतने बड़े पैमाने पर डोनाल्ड ट्रंप ने हमारे सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति और भारत का अपमान किया है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी, हिंदू संगठनों के शंकराचार्य से लेकर महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर और अन्य धर्मगुरु चुप्पी साधकर क्यों बैठे हुए हैं? इससे बड़ा अपमान इसके पहले भारत का कभी नहीं हुआ था। जो हिंदू संगठन यहां बात-बात पर खाने में, पीने में और धार्मिक क्रिया-कलापों को लेकर हिन्दू धर्म की आस्थाओं पर विवाद खड़ा करते हैं। वह सब कहां चले गए? अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक बार नहीं, दो बार नहीं, कई बार भारत की अस्मिता और भारत को नीचा दिखाने के लिए तरह-तरह के बयान दिए। अमेरिका से भारतीयों को हथकड़ी-बेड़ी में भारत भेजा। अब तो हद हो गई, डोनाल्ड ट्रंप की हिम्मत इतनी बढ़ गई है, उसने भारत को ही नरक का कुंड बता दिया। हिन्दू धर्म एवं भारतीयों का इससे बड़ा और कौन सा आपमान हो सकता है। अमेरिका में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस जो भारतीय मूल की हैं। सुंदर पिचाई भारतीय मूल के हैं। ऐसे लाखों भारतीय अमेरिका में रह रहे हैं। कमला हैरिस को छोड़ दें, तो किसी ने भी ट्रंप के बयान को लेकर कोई नाराजी नहीं जताई। भारतीय मूल के लोगों ने ट्रंप का जिस तरह से अमेरिका के चुनाव के दौरान समर्थन किया। अबकी बार ट्रम्प सरकार के नारे लगाए गए। दूसरी बार जब राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे, तब भारत में ट्रंप के लिए हवन पूजन भारतीयों ने किया। जो हवन पूजन और ट्रंप की गुणगान करने वाले भारतीय थे। वह भी देवभूमि को नरक कुंड बताने पर चुप्पी साध कर बैठे हुए हैं। इसको लेकर आम जनता के मन में नाराजी देखने को मिल रही है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई को आ जाएंगे। जिस तरह के हालात भारत में देखने को मिल रहे हैं। उससे ऐसा लग रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को नरक कुंड और पृथ्वी का नरक बताया है। दुनिया भर में भारतीय मूल के एनआरआई अमेरिका सहित अन्य देशों के ट्रंप के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आना, सभी को आश्चर्य में डाल रहा है। भारत में जिस तरह से अमेरिका की कंपनियां कारोबार कर रही हैं। यहां से कमा रही हैं, यहां से खा रही हैं। इसके बाद भी भारत की आस्था के साथ खेलकर भारत को नीचा दिखा रही हैं। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। इन कंपनियों का भारत में बहिष्कार करना होगा। अमेरिका के साथ अपने संबंध खत्म करना चाहिये। ट्रंप, दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद जिस तरह से भारत का अपमान कर रहे हैं, भारत सरकार द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही है। इससे लगता है, हम एक बार फिर ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश सरकार के गुलाम हो गए हैं। सारी दुनिया का आर्थिक, सामाजिक एवं सामरिक परिदृष्य बड़ी तेजी के साथ बदल रहा है। अमेरिका और इजराइल अलग-थलग पड़ गए हैं। चीन-रूस और ईरान ब्रिक्स संगठन के माध्यम से अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं। हम अभी भी अमेरिका और इजराइल की गुलामी कर रहे हैं। इससे भारतीय जनता की नाराजी अब स्पष्ट रूप से दिखने लगी है। भारत सरकार को समय रहते ना केवल विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए। वहीं भारत का आत्म सम्मान पूर्व की भांति सारी दुनिया में बना रहे, इसके लिए समय रहते अपनी ताकत और दृण इच्छा शक्ति का परिचय देना होगा। ईएमएस / 27 अप्रैल 26