तेहरान(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष में पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञ इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि ईरान ने अमेरिका के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स को आखिर गिरा कैसे दिया? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका ने दावा किया था कि उसने ईरान के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह तबाह कर दिया है। बावजूद इसके, 3 अप्रैल को अमेरिका का गर्व माना जाने वाला एफ-15ई स्ट्राइक ईगल मार गिराया गया और ए-10 वार्टहॉग को भी भारी नुकसान पहुंचा। पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार है जब किसी दुश्मन देश ने अमेरिका का लड़ाकू विमान गिराया है। तफ्तीश में सामने आया है कि ईरान ने इसके लिए रडार आधारित पारंपरिक सिस्टम के बजाय एक नई रणनीति का उपयोग किया है। अमेरिकी फाइटर जेट्स में रडार वॉर्निंग सिस्टम लगा होता है, जो दुश्मन के रडार की तरंगों को पकड़कर पायलट को सचेत कर देता है। लेकिन ईरान के इस छोटे एयर डिफेंस सिस्टम, जिसे माजिद नाम दिया गया है, में रडार होता ही नहीं है। रडार के अभाव में अमेरिकी विमान के सेंसर किसी खतरे को भांप ही नहीं पाए और बिना किसी चेतावनी के मिसाइल का शिकार हो गए। माजिद सिस्टम इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड तकनीक पर काम करता है। सरल शब्दों में कहें तो यह रडार तरंगों के बजाय इंजन से निकलने वाली गर्मी को ट्रैक करता है। इसमें लगे सेंसर 15 किलोमीटर दूर से ही विमान के इंजन की तपिश को पहचान लेते हैं और एडी-08 नाम की मिसाइल लॉन्च कर देते हैं। यह मिसाइल माक 2 यानी ध्वनि की गति से दोगुनी रफ्तार से सीधे इंजन की गर्मी का पीछा करते हुए विमान से टकरा जाती है। कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों के लिए यह काल साबित हो रही है। ईरान ने जिस तरह शाहिद ड्रोन्स के जरिए युद्ध की रणनीति बदली थी, वैसा ही कुछ उसने माजिद के साथ किया है। यह सिस्टम इतना छोटा है कि इसे एक साधारण मालवाहक गाड़ी पर फिट कर कहीं भी ले जाया जा सकता है। जंगलों, पहाड़ों या शहरों की गलियों में छिपे होने के कारण अमेरिका और इजराइल की भारी बमबारी के बाद भी ये सिस्टम बचे रह गए। आर्थिक रूप से भी यह काफी सस्ता सौदा है; जहां अमेरिकी जेट और मिसाइलें अरबों की होती हैं, वहीं एक माजिद मिसाइल की कीमत करीब 1.70 करोड़ रुपये और पूरे सिस्टम की लागत 5-10 लाख डॉलर के आसपास आंकी गई है। ईरान ने साबित कर दिया है कि युद्ध में केवल महंगी तकनीक ही नहीं, बल्कि सटीक और गुप्त पैंतरे भी बाजी पलट सकते हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/29अप्रैल2026