राष्ट्रीय
29-Apr-2026


-भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति ला सकती है मिश्रित प्रभाव नई दिल्ली,(ईएमएस)। वैश्विक ऊर्जा बाजार एक अहम मोड़ पर खड़ा है, जहां यूएई का ओपेक से बाहर होने का फैसला दूरगामी असर डाल सकता है। यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब बाजार पहले से ही ईरान युद्ध के चलते तनाव और आपूर्ति बाधाओं से जूझ रहा है। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज को लेकर है, जहां से दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल और एलएनजी आपूर्ति गुजरती है। फरवरी के अंत से इस मार्ग में रुकावटों के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक निकट भविष्य में यूएई के इस कदम का असर सीमित रह सकता है, क्योंकि मौजूदा आपूर्ति बाधाएं अभी भी बनी हुई हैं। ओपेक के उत्पादन कोटे से बाहर होने के बाद यूएई अपनी क्षमता के मुताबिक उत्पादन बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होगा। अबू धाबी की तेल कंपनी के अनुमान के मुताबिक उत्पादन 4.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ज्यादा तक पहुंच सकता है, जबकि ओपेक+ का मौजूदा कोटा करीब 3.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। हालांकि यह बढ़ोतरी धीरे-धीरे, अगले 12 से 18 महीनों में होने की संभावना है। इससे दीर्घकाल में वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है। विशेषज्ञों की बड़ी चिंता ओपेक की भूमिका को लेकर है। यूएई के बाहर होने से संगठन की उत्पादन अनुशासन बनाए रखने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। यदि अन्य सदस्य देश भी अपने-अपने उत्पादन को प्राथमिकता देने लगते हैं, तो वैश्विक तेल बाजार में तालमेल कम हो सकता है और कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। फिलहाल बैंड क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जो यह दिखाती है कि बाजार अभी भी आपूर्ति बाधाओं और भू-राजनीतिक स्थितियों पर ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति मिश्रित प्रभाव ला सकती है। अल्पकाल में ऊंची कीमतें महंगाई और आयात बिल पर दबाव बढ़ा सकती हैं। वहीं, लंबे समय में अगर आपूर्ति बढ़ती है, तो कीमतों में गिरावट से राहत मिल सकती है। यूएई का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलती रणनीतियों का संकेत देता है, जहां देश अब सामूहिक निर्णयों के बजाय अपनी उत्पादन क्षमता और मुनाफे को अधिकतम करने पर ध्यान दे रहे हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह फैसला एक अलग घटना है या वैश्विक तेल व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत। सिराज/ईएमएस 29अप्रैल26