न्यूयॉर्क के मेयर ने किंग चार्ल्स के सामने रखी मांग न्यूयॉर्क(ईएमएस)। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने ब्रिटिश राजशाही और उपनिवेशवाद की विरासतों पर एक बार फिर वैश्विक बहस छेड़ दी है। न्यूयॉर्क की धरती पर ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की मौजूदगी के बीच ममदानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे किंग चार्ल्स से भारत का विश्वप्रसिद्ध कोहिनूर हीरा वापस करने की अपील करेंगे। यह बयान उस समय आया है जब किंग चार्ल्स अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान 9/11 हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। मेयर ममदानी का यह रुख बेहद आक्रामक और सीधा है। उन्होंने साफ किया है कि वे किंग चार्ल्स को किसी भी प्रकार का ‘रॉयल ट्रीटमेंट’ देने के बजाय सीधे ऐतिहासिक न्याय के मुद्दे पर बात करेंगे। बातचीत में ममदानी ने बिना किसी झिझक के कहा, यदि मुझे उनसे अलग से बात करने का अवसर मिलता है, तो मैं उन्हें कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। कोहिनूर हीरा केवल एक कीमती रत्न नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराने उपनिवेशवाद और उस दौरान हुई लूट का एक बड़ा प्रतीक माना जाता है। ऐसे में जब न्यूयॉर्क जैसे दुनिया के सबसे प्रभावशाली शहर का निर्वाचित नेता सार्वजनिक रूप से इसे लौटाने की मांग करता है, तो यह महज एक टिप्पणी न रहकर एक गंभीर राजनीतिक और नैतिक मुद्दा बन जाती है। किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला वर्तमान में 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों के लिए अमेरिका में हैं। वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में होने वाले श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मेयर ममदानी भी शामिल होंगे। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य पीड़ितों को सम्मान देना है, लेकिन उनके बयान ने इस कूटनीतिक यात्रा में एक नया और संवेदनशील अध्याय जोड़ दिया है। ऐतिहासिक रूप से कोहिनूर का मामला अत्यंत जटिल रहा है। ब्रिटेन इसे कानूनी रूप से प्राप्त संपत्ति बताता है, जबकि भारत इसे औपनिवेशिक लूट का हिस्सा मानता रहा है। ममदानी का यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन देशों की मांगों को फिर से हवा दे सकता है जो ब्रिटेन के संग्रहालयों में बंद अपने ऐतिहासिक खजानों की वापसी की राह देख रहे हैं। औपचारिक कूटनीति की मेजों पर भले ही मुस्कुराहटें हों, लेकिन ममदानी की इस मांग ने दशकों से दबे हुए उन सवालों को फिर से सतह पर ला दिया है जो इतिहास की गलतियों को सुधारने से जुड़े हैं। अब देखना यह होगा कि ब्रिटेन इस पर क्या रुख अपनाता है। वीरेंद्र/ईएमएस/30अप्रैल2026 ---------------------------------