ज़रा हटके
01-May-2026
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लंदन (ईएमएस)। दुनिया भर में ऑर्गन ट्रैफिकिंग का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। यह कार्य गैर कानूनी होने के बावजूद लोग स्मगलिंग के जरिए इन अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त करते हैं। अमेरिका की मिलिमैन रिपोर्ट 2025 के अनुसार, कुछ बॉडी पार्ट्स की कीमत कानूनी मार्केट में सबसे ज्यादा पहुंच गई है, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर इंसान का सबसे महंगा अंग कौन सा है और क्यों इसकी इतनी भारी कीमत है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में सबसे महंगा ट्रांसप्लांट डबल लंग्स (दोनों फेफड़ों) का है। इस पूरे ऑपरेशन की औसत लागत करीब 23,46,500 डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2.34 करोड़ रुपये है। दूसरे नंबर पर हार्ट ट्रांसप्लांट है, जिसकी कीमत 19,18,700 डॉलर यानी 1.91 करोड़ रुपये के आसपास है। सिंगल लंग ट्रांसप्लांट की लागत 18,10,700 डॉलर, इंटेस्टाइन (आंत) ट्रांसप्लांट 17,29,500 डॉलर और बोन मैरो (अस्थि मज्जा) ट्रांसप्लांट 12,61,800 डॉलर में होता है। लिवर ट्रांसप्लांट की लागत भी 10,17,800 डॉलर यानी करीब 1 करोड़ रुपये है। ये कीमतें सिर्फ कानूनी मेडिकल ट्रांसप्लांट की हैं, जिसमें असली सर्जरी, डॉक्टर्स की फीस, आईसीयू में रुकने का खर्च, दवाइयाँ और लंबे समय तक की देखभाल को मिलाकर इतनी भारी रकम बन जाती है, जिसे चुका पाना आम इंसान के बस की बात नहीं है। डबल लंग ट्रांसप्लांट इसलिए सबसे महंगा है क्योंकि यह सर्जरी बेहद जटिल और जोखिम भरी होती है। फेफड़ों को बदलना, उन्हें शरीर में सफलतापूर्वक फिट करना और प्रत्यारोपण के बाद अंग के अस्वीकार होने (रिजेक्शन) के खतरे को कम करना – यह सब कुछ बहुत मुश्किल और अत्यधिक विशेषज्ञता वाला कार्य है। हार्ट ट्रांसप्लांट भी कम जटिल नहीं है, और मरीज की जिंदगी बचाने के लिए यह भारी खर्चा जरूरी हो जाता है, लेकिन यह आम आदमी की पहुंच से बाहर है। लेकिन असली चौंकाने वाली बात तो ब्लैक मार्केट की कीमतें सुनकर लगती है। कानून के बावजूद, दुनिया भर में ऑर्गन ट्रैफिकिंग का कारोबार सालाना 84 करोड़ से 1.7 अरब डॉलर कमा रहा है। ज्यादातर मामलों में, किडनी सबसे ज्यादा बिकने वाला अंग है। ब्लैक मार्केट में खरीदार 50,000 से 1,20,000 डॉलर तक चुकाते हैं, लेकिन विक्रेता को इसका सिर्फ 5-10 प्रतिशत ही मिलता है। बाकी पैसा ब्रोकर और माफिया खा जाते हैं। लिवर, हार्ट और लंग्स भी स्मगलिंग के जरिए बेचे जाते हैं। गरीब देशों में गरीबों को नौकरी या पैसे का लालच देकर उनके अंग निकाले जाते हैं, और कई बार तो जबरन अंग हड़प लिए जाते हैं। भारत, पाकिस्तान, नेपाल, चीन जैसे देशों में यह धंधा खूब फल-फूल रहा है। किडनी वैली जैसे इलाके मशहूर हैं जहाँ लोग अपनी किडनी बेचकर गुजारा करने को मजबूर होते हैं। ब्रोकर अमीर मरीजों से संपर्क करते हैं और गरीब दाताओं को फंसाते हैं। ऑपरेशन अक्सर गैरकानूनी क्लिनिक या अस्पतालों में होते हैं, जहाँ स्वास्थ्य मानकों का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। सर्जरी के बाद दाता बीमार पड़ जाता है और अक्सर उसे कोई मुआवजा नहीं मिलता, जबकि ब्रोकर गायब हो जाता है। मरीज को नया अंग तो मिल जाता है, लेकिन संक्रमण, रिजेक्शन और कानूनी सजा का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, हर साल करीब 12,000 अवैध ट्रांसप्लांट होते हैं, जो कुल ट्रांसप्लांट का लगभग 10 प्रतिशत है। लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि ज्यादातर केस छिपे रहते हैं। डब्लूएचओ और अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अंग व्यापार मानव तस्करी का सबसे घिनौना रूप है। कई देशों में सख्त कानून बने हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और गरीबी की वजह से यह रुक नहीं रहा है। सुदामा/ईएमएस 01 मई 2026