राष्ट्रीय
01-May-2026
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-20 साल की कमाई मिट्टी में मिली, भारत के लिए भी है खतरे की घंटी? नई दिल्ली,(ईएमएस)। चीन के प्रॉपर्टी मार्केट में आई सुनामी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। चीन में घरों की कीमतें गिरकर साल 2005 के स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसका अर्थ है कि पिछले दो दशकों में रियल एस्टेट क्षेत्र में हुई पूरी तरक्की लगभग शून्य हो गई है। इस खबर ने न केवल वैश्विक निवेशकों को चौंकाया है, बल्कि भारत के प्रॉपर्टी बाजार में निवेश करने वाले लोगों के मन में भी डर पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ चीन की इस गिरावट को एक ‘धीमी मौत’ के रूप में देख रहे हैं, जो पिछले चार वर्षों से निरंतर जारी है। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के आंकड़ों के अनुसार, मुद्रास्फीति को समायोजित करने के बाद चीन में घरों की कीमतें 2021 के अपने उच्चतम स्तर के मुकाबले करीब 23 प्रतिशत तक गिर चुकी हैं। चीन की अर्थव्यवस्था, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, उसमें रियल एस्टेट की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत थी। वहां के आम नागरिक शेयर बाजार के बजाय प्रॉपर्टी को निवेश का सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते थे। अब कीमतों में इस भारी गिरावट ने करोड़ों परिवारों की जीवनभर की जमा-पूंजी को संकट में डाल दिया है। इस संकट ने चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनियों को धराशायी कर दिया है। एवरग्रांडे जैसी विशाल कंपनी 300 अरब डॉलर के कर्ज के बोझ तले दबकर बर्बाद हो गई, जबकि कंट्री गार्डन और वानके जैसी कंपनियां भी भारी घाटे और कर्ज के भंवर में फंसी हुई हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीन में इस समय करीब 391 मिलियन वर्ग मीटर क्षेत्र में बने हुए घर खाली पड़े हैं, जिनका कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। चीन के इन हालातों ने भारत में भी एक बहस छेड़ दी है। क्या रुपये की गिरती कीमत, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और नौकरियों पर मंडराते संकट का असर भारतीय रियल एस्टेट पर पड़ेगा? हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चीन के बाजारों की बुनियादी संरचना में बड़ा अंतर है। चीन में जरूरत से ज्यादा निर्माण संकट की मुख्य वजह बना, जबकि भारत में अभी भी रहने के लिए घरों की भारी मांग बनी हुई है। भारत का बाजार केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक उपभोग पर टिका है। फिर भी, चीन का यह संकट एक कड़ा सबक है कि यदि बिना ठोस आधार के कीमतें अनियंत्रित ढंग से बढ़ती रहीं, तो भविष्य में चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। फिलहाल, भारतीय बाजार के लिए चीन की यह स्थिति एक चेतावनी और सावधानी का संकेत है। वीरेंद्र/ईएमएस 01 मई 2026