राज्य
01-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। नकली दवाओं का नेटवर्क राष्ट्रीय राजधानी में अब एक ऐसे स्तर पर पहुंच गया है, जहां महंगी और लाइफ-सेविंग दवाओं में असली दवा तत्व (एपीआइ) व इंसुलिन की जगह सलाइन, डिस्टिल्ड वाटर और स्टार्च जैसे सस्ते पदार्थ भर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा। रहा है। दवाओं की जांच कर रहीं एजेंसियों के अनुसार यह केवल मिलावट नहीं, बल्कि पूरी तरह से नकली दवा का मामला है। जिसमें दवा का बाहरी रूप असली होता है, लेकिन अंदर की सामग्री बेअसर या खतरनाक होती है। नकली दवाओं का यह नेटवर्क अब सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि मरीजों पर मुनाफे का खतरा बन गया है, जहां उपचार की जगह मरीजों को धोखा मिल रहा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की फरवरी 2026 की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में देशभर में 194 दवा गुणवत्ता परीक्षण में फेल (एनएसक्यू) पाई गईं, पैरासिटामोल व पेंटाप्राजोल जैसी आम दवा भी इनमें शामिल थीं। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर संसद में दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 3,104 दवा सैंपल ‘नाट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (एनएसक्यू)’ पाए गए, यानी वे निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा दिसंबर 2025 में अकेले 167 सैंपल फेल पाए गए, जो यह दर्शाता है कि समस्या लगातार बनी हुई है। - ईएमएस/01/ मई/2026