03-May-2026
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वाराणसी (ईएमएस)। पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में 2 मई, 2026 को बुद्ध जयंती का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। यह विभाग भारत में बौद्ध अध्ययन एवं पालि भाषा के प्रमुख केन्द्रों में से एक है तथा दीर्घकाल से बौद्ध विद्वत्ता, सांस्कृतिक परम्पराओं एवं शैक्षिक गतिविधियों के संवर्धन में संलग्न रहा है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में परम पूज्य के. सिरी सुमेधा महाथेरो, मुख्य अधिष्ठाता, जम्बूद्वीप श्रीलंका विहार, सारनाथ, वाराणसी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सुषमा घिल्डियाल, संकाय प्रमुख, कला संकाय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ने की। समारोह का शुभारम्भ परम्परानुसार एवं श्रद्धापूर्वक बाल-बुद्ध की प्रतिमा पर सुगंधित जलाभिषेक से हुआ, जो पवित्रता, करुणा एवं मन की शुद्धि का प्रतीक है। इसके उपरान्त भगवान बुद्ध की पवित्र प्रतिमा पर पुष्पार्पण किया गया। बुद्ध जयंती का यह पावन पर्व विश्वभर में भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, संबोधि तथा महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों, भिक्षु-भिक्षुणियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का औपचारिक स्वागत प्रो. अरुण कुमार यादव, अध्यक्ष, पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग, बी.एच.यू. द्वारा किया गया। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन में बुद्ध जयंती के आध्यात्मिक एवं शैक्षिक महत्व को रेखांकित करते हुए विभाग की सतत प्रतिबद्धता को व्यक्त किया कि वह शिक्षा, शोध एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बुद्ध के सार्वभौमिक संदेश का प्रसार करता रहेगा। इस अवसर पर अनेक विशिष्ट प्राध्यापक एवं विद्वान उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. प्रद्युम्न दुबे, प्रो. हरिशंकर शुक्ल, प्रो. कमलेश कुमार जैन, डॉ. राहुल चतुर्वेदी, डॉ. आनंद जैन, डॉ. अभिलाषा, डॉ. रमा शुक्ला, डॉ. प्रीति कुमारी दुबे एवं डॉ. बुद्ध घोष प्रमुख रहे। कार्यक्रम में पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न देशों से आए भिक्षु एवं भिक्षुणियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही, जिससे आयोजन को वास्तविक अंतरराष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक स्वरूप प्राप्त हुआ। अपने मुख्य उद्बोधन में परम पूज्य के. सिरी सुमेधा महाथेरो ने वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की शाश्वत प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि करुणा, मैत्री, अहिंसा तथा सम्यक स्मृति के सिद्धांत आज विश्व में शांति, सौहार्द और आंतरिक संतुलन स्थापित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बौद्ध अध्ययन की गौरवशाली परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को भारत की गहन आध्यात्मिक परम्पराओं से पुनः जोड़ने के साथ-साथ उन्हें नैतिक मूल्यों, सहिष्णुता एवं मानवीय दृष्टिकोण को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करते हैं। चीन के क्वाङ्ग्चौ विश्वविद्यालय के डा. विवेकमणि त्रिपाठी ने चीन के संस्मरणों के आधार पर चीन में बौद्ध धर्म की रूपरेखा प्रस्तुत की साथ ही, सभा को प्रो. प्रदूम्न दुबे तथा प्रो. हरिशंकर शुक्ल नें भी संबोधित किया। अन्य प्राध्यापकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बुद्ध जयंती के ऐतिहासिक महत्व तथा वर्तमान समाज में बौद्ध दर्शन की सतत उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक समरसता, मानसिक अनुशासन तथा विश्वबंधुत्व के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक सिद्ध होती हैं। सम्पूर्ण विभागीय परिसर भिक्षुओं द्वारा गाए गए बौद्ध मंगलपाठ, शांति-पाठ एवं विद्यार्थियों की श्रद्धापूर्ण सहभागिता से भक्तिमय एवं शांतिमय वातावरण में परिवर्तित हो उठा। कार्यक्रम का समापन डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, सभी विशिष्ट प्राध्यापकों, भिक्षु-भिक्षुणियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। अंत में विश्व शांति, सौहार्द एवं समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु सामूहिक मंगलकामनाएँ की गईं। कार्यक्रम का संचालन देचन ने किया। - 03 मई 26