-एक क्रूज शिप पर वायरस से तीन की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सतर्कता बढ़ी वाशिंगटन,(ईएमएस)। कोरोना महामारी की मार झेल रही दुनिया में फिर एक और हंता वायरस ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर इस वायरस से तीन लोगों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों के मुताबिक यह संक्रमण मुख्य रूप से चूहों के जरिए फैलता है और गंभीर स्थिति में इसकी मृत्यु दर काफी ज्यादा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अर्जेंटीना से दक्षिण अफ्रीका जा रहे क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर संक्रमण के मामले सामने आने के बाद विशेषज्ञों ने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। हंता वायरस कोई नया संक्रमण नहीं है, लेकिन इसकी घातक प्रकृति इसे बेहद खतरनाक बनाती है। यह वायरस मुख्य रूप से जंगली चूहों की कुछ विशेष प्रजातियों में पाया जाता है। संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार के सूखने के बाद जब उनके कण हवा में फैलते हैं और कोई व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद हाथ मुंह या नाक तक पहुंचाने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक हंता वायरस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। हालांकि दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले एंडिस स्ट्रेन में कुछ दुर्लभ मामलों में इंसान से इंसान में संक्रमण देखा गया है। सामान्य रूप से यह वायरस चूहों और दूषित वातावरण के संपर्क से ही फैलता है। इस संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिससे लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, थकान, उल्टी, दस्त और पेट दर्द इसके शुरुआती लक्षण माने जाते हैं। संक्रमण बढ़ने पर मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी शुरू हो सकती है। कई मामलों में फेफड़ों में पानी भर जाता है और रक्तचाप तेजी से गिरने लगता है। कुछ मरीजों में किडनी पर भी गंभीर असर देखा गया है। स्वास्थ्य एजेंसियों के मुताबिक हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम में मृत्यु दर 38 से 40 फीसदी तक हो सकती है। फिलहाल इस वायरस का कोई विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीजों का उपचार अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेटर और अन्य जीवन रक्षक चिकित्सा के जरिए किया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों ने लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, घरों में चूहों की आवाजाही रोकने और पुराने या बंद कमरों की सफाई करते समय मास्क व दस्ताने पहनने की सलाह दी है। चूहों के मल या गंदगी को सूखे झाड़ू से साफ करने के बजाय कीटाणुनाशक का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सावधानी ही इस खतरनाक वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। सिराज/ईएमएस 08 मई 2026