* पीएम मोदी के 500 जीडब्ल्यू हरित ऊर्जा विजन को गति देगा गुजरात का बैटरी स्टोरेज मॉडल अहमदाबाद (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने देश में ऊर्जा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारत के पहले सोलर विलेज मोढेरा में सोलर पावर प्लांट के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के सफल अमलीकरण के बाद अब गुजरात पूरे देश में ऊर्जा भंडारण प्रणाली को आगे बढ़ाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मोढेरा परियोजना की सफलता के बाद राज्य में वर्तमान में कुल 5 स्थानों पर 870 मेगावॉट क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज व्यवस्थाएं शुरू की जा चुकी हैं। इसके अलावा अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा, पाटण और कच्छ जिलों में 13 नए बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स का पंजीकरण किया गया है। इन भविष्यदर्शी परियोजनाओं और मजबूत नीतियों के कारण गुजरात आने वाले समय में ऊर्जा भंडारण के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। * चरल, मोढेरा और लखपत में आधुनिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम सक्रिय हाल ही में अहमदाबाद जिले के साणंद तालुका स्थित चरल में अत्याधुनिक बैटरी स्टोरेज प्रणाली शुरू की गई है। इसके अलावा महेसाणा के मोढेरा तथा कच्छ के लखपत में भी कुल चार बैटरी स्टोरेज प्रणालियां कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने अपनी “गुजरात इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी – 2025” में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया है। इस नीति के अंतर्गत स्वतंत्र बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स, नए रिन्यूएबल ऊर्जा प्रोजेक्ट्स से जुड़े बैटरी सिस्टम तथा पहले से संचालित सोलर एवं विंड परियोजनाओं के साथ एकीकृत बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को अनुमति दी जा रही है। * औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ राज्य सरकार जल्द ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी देने के बाद औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए भी बैटरी स्टोरेज पंजीकरण शुरू करेगी। इसके बाद उद्योग और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने सोलर अथवा विंड प्रोजेक्ट्स के साथ बैटरी स्टोरेज सुविधाएं स्थापित कर सकेंगे। * क्यों जरूरी है बैटरी स्टोरेज सिस्टम? बैटरी स्टोरेज सिस्टम ऊर्जा के कुशल प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से होने वाला बिजली उत्पादन दिनभर समान नहीं रहता। दिन में सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है, जबकि शाम होते ही यह लगभग बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में दिन के समय उत्पादित अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में संग्रहित किया जाता है, ताकि शाम के पीक लोड के दौरान उसी बिजली की आपूर्ति की जा सके। इससे बिजली ग्रिड पर अचानक बढ़ने वाले दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और ग्रिड की स्थिरता बनी रहती है। * गेटको और डिस्कॉम कर रहे स्मार्ट प्लानिंग गेटको तथा राज्य की बिजली वितरण कंपनियां ग्रिड क्षमता को ध्यान में रखते हुए बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन कर रही हैं। इन परियोजनाओं को रिन्यूएबल ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के निकट स्थापित किया जा रहा है ताकि अतिरिक्त ऊर्जा को तेजी से संग्रहित किया जा सके तथा ट्रांसमिशन लॉस और ऊर्जा की बर्बादी को रोका जा सके। यह बैटरी स्टोरेज प्रणाली केवल बिजली संग्रहण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रिड को वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी सपोर्ट देकर उसे स्थिर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही यह आपातकालीन बैकअप व्यवस्था के रूप में भी कार्य करेगी। * 2030 के हरित ऊर्जा लक्ष्य में गुजरात निभाएगा बड़ी भूमिका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2030 तक भारत में 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के विजन को साकार करने में गुजरात की ये पहल निर्णायक साबित हो सकती है। ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में राज्य की यह रणनीतिक प्रगति देश के हरित ऊर्जा भविष्य को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। सतीश/08 मई