कांग्रेस के निर्णय ने राज्य में बीजेपी के आने का रास्ता साफ किया नई दिल्ली (ईएमएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के साथ गठबंधन करने के कांग्रेस के फैसले की कड़ी आलोचना कर दी है। शुक्रवार को उन्होंने कांग्रेस के निर्णय को बहुत खराब बताकर कहा कि इससे निम्न स्तर के राजनीतिक अवसरवाद की बू आती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अय्यर ने जोर दिया कि अगर यह कदम द्रविड़ राजनीति के वर्चस्व वाले राज्य में सांप्रदायिक भाजपा के पिछले दरवाजे से प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करता है, तब यह राजनीतिक इतिहास में सबसे खतरनाक और सबसे खराब आत्मघाती गोल साबित होगा। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का दावा है कि कांग्रेस आज महात्मा गांधी की पार्टी के विचारों का ही उल्लंघन कर रही है। उन्होंने कहा, नवंबर 1925 में, सौ साल पहले महात्मा गांधी ने अपनी गुजराती मैगजीन नवजीवन के माध्यम से निर्देश दिया था कि स्वराज का अर्थ नैतिक मूल्यों पर आधारित शासन होना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अय्यर ने कहा कि वह कल्पना भी नहीं कर सकते कि कांग्रेस के पूर्वज ऐसी अवसरवाद की राजनीति को अपना आशीर्वाद दे रहे है। उन्होंने कहा कि द्रमुक के साथ चुनाव लड़ने के तुरंत बाद उस टीवीके के साथ गठजोड़ करने का फैसला बेहद अनुचित है, जिस पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 23 सीटों पर हराया था। अय्यर के अनुसार, यह महात्मा गांधी के 1925 के उस कथन का अक्षम्य उल्लंघन है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वराज को नैतिकता पर आधारित सरकार होनी चाहिए। एक लेख में, वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि तमिलनाडु में कांग्रेस के साझेदार बदलने में चाणक्य की जीत हुई है या महात्मा गांधी की? उनका तर्क था कि कांग्रेस ने पिछले चुनावों में जो पांच सीटें जीतीं, वे उसने अपने दम पर नहीं, बल्कि पूरी तरह से द्रमुक के साथ अपनी दशकों पुरानी कनिष्ठ साझेदारी के बल पर जीती थीं। यह साझेदारी ही उसकी सफलता का आधार रही है। वास्तव में, कांग्रेस नेता अय्यर के पूर्व संसदीय क्षेत्र मयिलादुतुरई का उदाहरण देकर बताया कि द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन इतना मजबूत गढ़ साबित हुआ था कि इसके छह विधानसभा क्षेत्रों में से पांच ने विजय की टीवीके के खिलाफ गठबंधन के सदस्यों के पक्ष में मतदान किया। इसमें दो सीटें द्रमुक को, और एक-एक सीट गठबंधन सहयोगियों डीएमडीके, आईयूएमएल और कांग्रेस को मिली थीं। उन्होंने बताया कि इस प्रकार, जनादेश स्पष्ट रूप से द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में और राजनीति में नए उतरे पक्ष के खिलाफ गया था। अय्यर ने कहा कि बीते 35 वर्षों से इस विलक्षण संसदीय क्षेत्र के साथ अपने जुड़ाव के संदर्भ में, वह बेहद खेद और दुख के साथ यह लेख लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, यह देखकर कि राज्यव्यापी जनादेश पुरानी द्रविड़ पार्टियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके पक्ष में था और सी.जोसेफ विजय की टीवीके के पक्ष में भी नहीं, और विजय पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष हैं, एक पुराने और आजमाए हुए साथी को छोड़ने में निम्न स्तर की राजनीतिक अवसरवादिता की बू आती है। आशीष दुबे / 08 मई 2026