08-May-2026
...


नई दिल्ली,(ईएमएस)। नई दिल्ली में तमिलनाडु की नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तब राज्यपाल का कर्तव्य होता है कि वह सदन में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करे। कांग्रेस नेता चिदंबरम ने कहा कि यह केवल राजनीतिक परंपरा ही नहीं, बल्कि संसदीय व्यवस्था का स्थापित नियम भी है। उन्होंने लिखा कि निर्वाचित विधायकों की संख्या के आधार पर सबसे बड़े दल के नेता को पहले सरकार गठन का मौका मिलना चाहिए। इसके बाद वह विधानसभा में बहुमत साबित कर सकता है। कांग्रेस नेता ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के 1994 के ऐतिहासिक फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विधानसभा को ही बहुमत परीक्षण का सही मंच माना है। चिदंबरम ने उन तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टियों की भी सराहना की, जिन्होंने इस सिद्धांत को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया और उसका समर्थन किया। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार किसी भी दल को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ है। अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी ने 108 सीटें जीती हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे अभी भी करीब 10 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। बहुमत का आंकड़ा नहीं होने की वजह से राज्यपाल ने अभी तक विजय को सरकार गठन का न्योता नहीं दिया है। हालांकि, कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान किया है। इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति में सरकार गठन को लेकर गतिविधियां और तेज हो गई हैं। आशीष दुबे / 08 मई 2026