क्षेत्रीय
09-May-2026
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- इंदौर के दशहरा मैदान पर 27 मई से शिवशाही महानाट्य का भव्य आयोजन - 250 कलाकारों और सजीव युद्ध दृश्यों के साथ शौर्य गाथाओं से रूबरू होगी अहिल्या नगरी; 120 फीट लंबा किला बनेगा मुख्य आकर्षण इंदौर (ईएमएस)। मालवा की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर इस माह एक अद्वितीय ऐतिहासिक और भव्य उत्सव का साक्षी बनने जा रही है। संस्था शिवराय के तत्वावधान में आगामी 27 से 31 मई तक शहर के दशहरा मैदान पर शिवशाही महानाट्य का मंचन किया जाएगा। यह महानाट्य केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि स्वराज्य और राष्ट्रीय गौरव को समर्पित एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन है, जो दर्शकों को सीधे छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली कालखंड में ले जाएगा। आयोजन को लेकर शहर में उत्साह का वातावरण है और इसे सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है। संस्था शिवराय के अध्यक्ष भूपेंद्र अड़सुले के अनुसार, यह आयोजन छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस और उनके बलिदान की अनसुनी कहानियों को आम जनमानस तक पहुँचाने का एक ईमानदार प्रयास है। लेखक व निर्देशक महेंद्र वसंतराव महाडिक के निर्देशन में तैयार इस महानाट्य की विशालता का केंद्र बिंदु मंच पर निर्मित 120 फीट लंबा और पांच मंजिला ऊंचा किले का भव्य प्रतिरूप है। यह विशाल ढांचा दर्शकों को किलों की प्राचीर पर होने वाली हलचलों का वास्तविक और रोमांचक अनुभव प्रदान करेगा। महानाट्य की सबसे अनूठी विशेषता इसकी सजीव प्रस्तुति है, जिसमें 250 से अधिक कलाकार एक साथ मंच साझा करेंगे। दृश्य को जीवंत बनाने के लिए मंच पर घोड़ों, ऊंटों और बैलगाड़ियों का वास्तविक उपयोग किया जाएगा। मराठों और पठानों के बीच होने वाले भीषण युद्ध के दृश्य, तोपों की गड़गड़ाहट और अग्निबाणों की वर्षा दर्शकों को उस ऐतिहासिक दौर की याद दिलाएगी जहाँ हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी गई थी। तकनीकी रूप से भी यह नाटक बेहद उन्नत है, जिसमें 5.1 सराउंड साउंड और अत्याधुनिक प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से 18 फीट लंबे जहाज पर शिवाजी महाराज के कोंकण विजय अभियान को प्रभावी ढंग से दर्शाया जाएगा। संस्था के सचिव रुचिर भोंसले और उपाध्यक्ष हेमंत मुरमरकर ने बताया कि महाराष्ट्र और गोवा के विभिन्न शहरों में भारी सफलता के बाद अब इंदौर में यह आयोजन मराठी अस्मिता और भारतीय विरासत के संगम के रूप में प्रस्तुत होने जा रहा है। 27 से 31 मई तक प्रतिदिन शाम सात बजे आयोजित होने वाला यह महानाट्य इंदौर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय लिखेगा, जहाँ वर्तमान पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत की धड़कनें प्रत्यक्ष सुनने और देखने का अवसर प्राप्त होगा। प्रकाश/09 मई 2026