- समय पर जांच और उपचार से बच्चों को मिल सकता है बेहतर जीवन भोपाल (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस, 8 मई 2026 के अवसर पर एम्स भोपाल के शिशु रोग विभाग द्वारा बाल रोग बाह्य रोगी विभाग परिसर में थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिन विकारों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को बीमारी के लक्षण, समय पर जांच, बचाव और उपचार के बारे में सरल भाषा में जानकारी देना था। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) शिखा मलिक (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग) ने किया। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, विवाह पूर्व स्क्रीनिंग, गर्भावस्था के दौरान जांच और सामुदायिक जागरूकता से थैलेसीमिया की रोकथाम संभव है। डॉ. योगेन्द्र सिंह यादव (अतिरिक्त प्रोफेसर, शिशु रोग विभाग) ने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है, जिससे परिवारों पर लंबे समय तक मानसिक, सामाजिक और आर्थिक बोझ पड़ता है। डॉ. मेघा धवन (डीएम पीडियाट्रिक हीमेटो-ऑन्कोलॉजी) और डॉ. पूजा सोनी (सीनियर रेजिडेंट) ने थैलेसीमिया के लक्षण, जांच, गर्भपूर्व परीक्षण, रक्त आधान, कीलेशन थेरेपी तथा समय पर उपचार मिलने पर बच्चों के बेहतर भविष्य की जानकारी दी। कार्यक्रम में मरीजों, अभिभावकों, देखभालकर्ताओं, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने भाग लिया तथा उन्हें जागरूकता सामग्री और परामर्श भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए पीडियाट्रिक हीमेटोलॉजी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य रक्त संबंधी रोगों के प्रति शैक्षणिक रुचि और ज्ञान को बढ़ावा देना था। प्रतियोगिता में डॉ. श्रीनिवास ने प्रथम, डॉ. स्वास्तिका नायक ने द्वितीय और डॉ. श्रीप्रदा शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। शिशु रोग विभाग, एम्स भोपाल ने जनजागरूकता, समय पर निदान और बेहतर उपचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ईएमएस/09/05/2026