- स्कूल के प्यार को बनाया जीवनसाथी नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी हुए जिन्होंने अपनी प्रतिभा से लोगों का ध्यान खींचा, लेकिन उनका अंतरराष्ट्रीय करियर ज्यादा लंबा नहीं चल सका। पूर्व तेज गेंदबाज अतुल वासन भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल हैं। आज की पीढ़ी उन्हें क्रिकेट कमेंटेटर और विश्लेषक के रूप में पहचानती है, लेकिन 1990 के दशक की शुरुआत में वह अपनी तेज गेंदबाजी, स्विंग और निजी जिंदगी को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। क्रिकेट के मैदान पर उनका सफर भले ही छोटा रहा, लेकिन उनकी प्रेम कहानी आज भी लोगों के बीच मिसाल की तरह याद की जाती है। दिल्ली के वसंत विहार में स्थित गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही अतुल वासन की क्रिकेट प्रतिभा सामने आने लगी थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात सोनू से हुई, जो बाद में उनकी जीवनसंगिनी बनीं। स्कूल के दिनों में शुरू हुआ यह रिश्ता समय के साथ और मजबूत होता गया। अतुल वासन के करीबी बताते हैं कि वह शुरू से ही दो चीजों के दीवाने थे, क्रिकेट और सोनू। किशोरावस्था में शुरू हुआ यह प्यार आगे चलकर शादी तक पहुंचा और सोनू हर मुश्किल दौर में उनके साथ खड़ी रहीं। अतुल वासन का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर बहुत छोटा रहा। उन्होंने भारत के लिए 1990 से 1991 के बीच केवल चार टेस्ट और नौ एकदिवसीय मुकाबले खेले। हालांकि कम समय में भी उन्होंने अपनी गेंदबाजी से प्रभाव छोड़ा। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 10 विकेट हासिल किए, जिसमें न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च टेस्ट में एक पारी में 108 रन देकर चार विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। वहीं एकदिवसीय क्रिकेट में उन्होंने नौ मैचों में 11 विकेट लिए और उनकी इकॉनमी रेट 3.98 रही, जिसे उस दौर में काफी शानदार माना जाता था। अतुल वासन सिर्फ गेंदबाज ही नहीं, बल्कि उपयोगी बल्लेबाज भी थे। 1990 में ऑकलैंड टेस्ट के दौरान उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 53 रन की अहम पारी खेली थी। घरेलू क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 1300 से ज्यादा रन बनाए और दो शतक भी लगाए। इसके अलावा उनके नाम 290 विकेट दर्ज हैं, जो उनकी प्रतिभा का बड़ा प्रमाण माने जाते हैं। इतनी अच्छी शुरुआत के बावजूद उनका करियर जल्द खत्म हो गया। उस समय खिलाड़ियों के लिए आधुनिक फिटनेस और रिकवरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। चोट के बाद जल्द वापसी की कोशिश में उनकी गेंदबाजी की धार कम होती चली गई। साथ ही उस दौर में भारतीय टीम में तेज गेंदबाजों के लिए सीमित मौके होते थे, जिससे प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाती थी। हालांकि क्रिकेट में उनकी पारी छोटी रही, लेकिन निजी जिंदगी में उनका रिश्ता बेहद सफल साबित हुआ। अतुल और सोनू की प्रेम कहानी किसी फिल्मी कहानी जैसी नहीं, बल्कि सादगी और भरोसे पर टिकी एक सच्ची कहानी है। स्कूल के दिनों से शुरू हुआ उनका साथ जिंदगी के हर उतार-चढ़ाव में कायम रहा। आज भी लोग उनकी कहानी को इस बात की मिसाल मानते हैं कि जिंदगी में असली सफलता केवल मैदान पर नहीं, बल्कि रिश्तों को निभाने में भी होती है। डेविड/ईएमएस 10 मई 2026