वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई हफ्तों से जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव को कम करने की कोशिशों को रविवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ईरानी प्रस्ताव के सामने आते ही राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, मुझे यह पसंद नहीं है, यह बिल्कुल भी मंजूर नहीं है। ट्रंप के इस कड़े संदेश के तुरंत बाद वैश्विक बाजार में खलबली मच गई और कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 डॉलर प्रति बैरल तक की तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। 28 फरवरी से चल रहे इस संघर्ष के बीच उम्मीद की जा रही थी कि मध्यस्थता के जरिए कोई रास्ता निकलेगा, लेकिन ट्रंप के कड़े रुख ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। ईरान ने अपने आधिकारिक माध्यमों से अमेरिका के पुराने प्रस्ताव का जवाब देते हुए युद्ध को हर मोर्चे पर समाप्त करने की पेशकश की थी। इस प्रस्ताव में लेबनान में संघर्ष रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था। हालांकि, शांति की इस अपील के साथ ईरान ने कुछ बेहद सख्त शर्तें भी जोड़ दी थीं, जो अमेरिका को नागवार गुजरीं। ईरान की शर्तों में युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा, तेल बिक्री पर लगी रोक हटाना, सभी अमेरिकी प्रतिबंधों की समाप्ति और भविष्य में हमला न करने की लिखित गारंटी शामिल थी। साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पूर्ण संप्रभुता के सम्मान की भी मांग की। दूसरी ओर, ईरान ने भी अपने रुख में नरमी न लाने के संकेत दिए हैं। ईरानी पक्ष की ओर से कहा गया है कि उनका प्रस्ताव ईरान के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, न कि अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए। उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसी के माध्यम से ईरान का यह जवाब अमेरिका तक पहुंचाया गया था। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता बंद नजर आ रहा है और सैन्य टकराव की स्थिति बनी हुई है। वीरेंद्र/ईएमएस/11मई 2026