- नाराज खरीदारों ने शुरू किया “मॉर्गेज बायकाट” - लंबे समय तक प्रॉपर्टी बाजार कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया - बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां भारी कर्ज में डूबी - आर्थिक संकट के कारण कई प्रोजेक्ट अधूरे बीजिंग/नई दिल्ली (ईएमएस)। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इन दिनों गंभीर प्रॉपर्टी संकट से गुजर रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई शहरों में मकानों और फ्लैटों की कीमतें 15-20 साल पुराने स्तर तक पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन के कई हिस्सों में प्रॉपर्टी के दाम 2005-06 के आसपास के रेट तक गिर चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि लाखों लोगों ने होम लोन की किस्तें यानी ईएमआई देना तक बंद कर दिया है। चीन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान एवरग्रांडे, कंट्री गार्डन और वांके जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां भारी कर्ज में डूब गईं। इन कंपनियों ने लोगों से पैसा लेकर हजारों प्रोजेक्ट शुरू किए, लेकिन आर्थिक संकट के कारण कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए। इससे नाराज खरीदारों ने “मॉर्गेज बायकाट” शुरू कर दिया और बैंकों को ईएमआई देना बंद कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में लंबे समय तक प्रॉपर्टी बाजार कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया। लोगों ने निवेश के लिए बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदे, लेकिन वास्तविक मांग उतनी नहीं थी। जब अर्थव्यवस्था धीमी हुई और रोजगार संकट बढ़ा, तब प्रॉपर्टी बाजार का बुलबुला फूटने लगा। अब सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में भी ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं? रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार भारत और चीन की स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। भारत में अभी भी शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और घरों की वास्तविक मांग बनी हुई है। भारत में अधिकांश लोग जरूरत के लिए मकान खरीदते हैं, जबकि चीन में निवेश के लिए बड़े पैमाने पर खरीदारी हुई थी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। यदि बिल्डरों द्वारा अधूरे प्रोजेक्ट, अत्यधिक कर्ज, कृत्रिम कीमतें और निवेश आधारित खरीदारी तेजी से बढ़ी, तो भविष्य में कुछ शहरों में दबाव बन सकता है। खासतौर पर महानगरों में लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और ऊंची ईएमआई को लेकर चिंता जताई जा रही है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारत में रेरा कानून, बैंकिंग नियंत्रण और अपेक्षाकृत मजबूत मांग फिलहाल सुरक्षा कवच का काम कर रहे हैं। फिर भी चीन का उदाहरण यह बताता है कि यदि रियल एस्टेट बाजार केवल सट्टेबाजी और कर्ज पर आधारित हो जाए, तो बड़े आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।