राज्य
11-May-2026


* अहमदाबाद के गोता इलाके से साइबर पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया, देशभर में फैला नेटवर्क उजागर सूरत (ईएमएस)| शहर में साइबर अपराधियों ने दहशत फैला दी है। मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाकर सूरत के 72 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को 28 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर रु. 1.47 करोड़ की ठगी किए जाने का बड़ा मामला सामने आया है। सूरत साइबर क्राइम सेल ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर अहमदाबाद के गोता इलाके से मुख्य आरोपी उर्जित कवी को गिरफ्तार किया है। साइबर ठगों ने पीड़ित बुजुर्ग को फोन कर खुद को मुंबई साइबर क्राइम और सीबीआई अधिकारी बताया था। उन्होंने कहा कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड का उपयोग जेट एयरवेज के नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किया गया है। बुजुर्ग को भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने व्हाट्सएप पर पुलिस और क्राइम ब्रांच के फर्जी पत्र भी भेजे। इसके बाद उन्हें लगातार 28 दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखकर मानसिक दबाव बनाया गया और “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति में रखा गया। आरोपियों ने धमकी दी कि यदि वे गिरफ्तारी से बचना चाहते हैं तो उन्हें अपने सभी बैंक खाते और निवेश को लिक्विडेट कर आरबीआई वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने होंगे। डर के कारण बुजुर्ग ने कुल रु. 1,47,40,000 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। मुख्य आरोपी उर्जित सच्चिदानंद कवी, जो अहमदाबाद के गोता स्थित सेवी स्वराज-1 का निवासी है, वर्तमान में बेरोजगार बताया जा रहा है, लेकिन उसके बैंक खाते का उपयोग साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि उसके आईसीआईसीआई बैंक खाते में पीड़ित के रु. 39 लाख सीधे ट्रांसफर हुए थे और अब तक उसके खाते में रु. 2.84 करोड़ से अधिक का लेन-देन पाया गया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस एक खाते के खिलाफ देशभर के अलग-अलग राज्यों में 12 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं, जिससे इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क का संकेत मिलता है। सूरत पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी जैसे सीबीआई, ईडी या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही फोन पर पैसे की मांग करती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस तरह डराए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। फिलहाल पुलिस इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है, जो सीबीआई अधिकारी और आकाश कुलहारी जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने में शामिल थे। सतीश/11 मई