-सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट में लंबित जमानत मामलों को लेकर दिए निर्देश नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट में लंबित जमानत मामलों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि हाईकोर्ट में सालों से लंबित हजारों जमानत याचिकाएं स्वतंत्रता के अमूल्य अधिकार का उल्लंघन करती हैं। जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और इसके लिए तय सिस्टम बनाना जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट को जमानत याचिकाओं पर सबसे कम समय में फैसले लेने के लिए सराहना की। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी जमानत याचिकाओं की भारी संख्या लंबित है, पीठ ने इस तथ्य की सराहना की कि वहां लंबित मामलों की संख्या इतनी ज्यादा है कि न्यायाधीशों को प्रतिदिन करीब 200 जमानत याचिकाओं की सुनवाई करनी पड़ती है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सोमवार को सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिए हैं कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई तेजी से और नियमित तरीके से हो। जमानत के मामलों को हर हफ्ते या कम से कम दो हफ्ते में एक बार जरूर लिस्ट किया जाए। इसके लिए ऑटोमेटिक लिस्टिंग सिस्टम तैयार करने को कहा ताकि किसी मामले की सुनवाई सिर्फ तारीख पर तारीख तक सीमित न रहे। वर्तमान में अदालतों की सामान्य प्रक्रिया यह है कि वे आरोपी की जमानत याचिका पर नोटिस जारी करते हैं और संबंधित राज्य सरकार, जांच एजेंसी या अभियोजन पक्ष से जवाब मांगते हैं। जवाब कई हफ्तों बाद दाखिल होता है, जिससे आपराधिक मामलों में न्यायिक या पुलिस हिरासत से रिहाई की याचिकाओं के निपटारे में देरी होती है। कोर्ट ने कहा कि जमानत याचिका की पहली सुनवाई से पहले ही राज्य सरकार या जांच एजेंसी को अपनी स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इससे कोर्ट को मामले की स्थिति समझने में आसानी होगी और सुनवाई जल्द आगे बढ़ेगी। साथ ही जमानत याचिका दाखिल करने वाले वकील को उसकी कॉपी एडवोकेट जनरल या संबंधित एजेंसी को पहले से देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से कहा कि नई जमानत याचिकाओं को हर दूसरे दिन या ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते के भीतर सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए। इसके अलावा एडमिशन स्टेज पर नोटिस जारी करने की पुरानी प्रक्रिया खत्म करने की बात भी कही गई है क्योंकि इससे मामलों में देरी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों से जुड़े मामलों में जांच अधिकारियों को ज्यादा जिम्मेदारी से काम करना होगा। अगर जांच में ढिलाई बरती गई तो इसका फायदा आरोपी को जमानत मिलने के रूप में मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट जांच एजेंसियां और सरकारें मिलकर ऐसा सिस्टम बनाएं जिससे पीड़ितों के अधिकार भी सुरक्षित रहें और जमानत मामलों का समय पर निपटारा भी हो सके। सिराज/ईएमएस 12मई26