16-May-2026
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शुभेंदु सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को दिए निर्देश दोबारा करें सत्यापन कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की बीजेपी नई सरकार ने राज्य में प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े कदम उठाए हैं। शुभेंदु सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर साल 2011 से अब तक जारी किए गए सभी 1.69 करोड़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्रों के दोबारा सत्यापन के आदेश दिए हैं। यह कदम पिछले कुछ सालों में दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर उठाए गए सवालों और शिकायतों के बाद उठाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सचिव द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि 2011 से अब तक करीब 1.69 करोड़ जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। यह देखा गया है कि इस अवधि में जारी किए गए कुछ जाति प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता और सत्यता को कई पक्षों द्वारा चुनौती दी गई है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप अपने अधीन आने वाले सभी एसडीओ, जो कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्राधिकारी हैं, को 2011 से जारी सभी जाति प्रमाणपत्रों के फिर सत्यापन की सलाह दें। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बिना उचित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के अपात्र लोगों को भी एससी, एसटी और ओबीसी प्रमाणपत्र जारी किए थे। अपात्र लोगों को जाति प्रमाणपत्र देने का यह सिलसिला 2021 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू हुआ था, ताकि तृणमूल कांग्रेस जंगलमहल क्षेत्र में अपना खोया हुआ जनाधार वापस पा सके। बता दें 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने कई सीटें जीती थीं। यह प्रक्रिया साल 2020 में शुरू किए गए द्वारे सरकार कार्यक्रम के बाद तेज हुई। गुरुवार को जारी आदेश में एक और कड़ा निर्देश दिया गया है। हाल ही में संपन्न एसआईआर के दौरान जिन व्यक्तियों या उनके आश्रितों के नाम राज्य की मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, उनके जाति प्रमाणपत्रों की भी गहन जांच की जाएगी और नियमों के तहत उन्हें रद्द किया जा सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस सत्यापन कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई लापरवाही पाई जाती है, तो प्रमाणपत्र जारी करने वाले संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी और कानूनी कार्रवाई होगी। सिराज/ईएमएस 16मई26