खेल
17-May-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में साल 2000 को सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में गिना जाता है। उस समय क्रिकेट की दुनिया मैच फिक्सिंग के गंभीर आरोपों से घिरी हुई थी और खेल की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे। प्रशंसकों का भरोसा टूट चुका था और भारतीय क्रिकेट मुश्किल दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में टीम इंडिया की कमान सौरव गांगुली के हाथों में आई। हाल ही में एक पॉडकास्ट में गांगुली ने उस दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने टीम को संभाला और भारतीय क्रिकेट को फिर से नई दिशा देने का प्रयास किया। सौरव गांगुली ने बताया कि जब उन्हें कप्तानी सौंपी गई, तब उनकी उम्र केवल 27 साल थी। देशभर में मैच फिक्सिंग को लेकर हंगामा मचा हुआ था, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह सब किस तरह होता है। उन्होंने खुलासा किया कि उस समय वह अपने सीनियर खिलाड़ियों से अक्सर पूछा करते थे कि क्या वास्तव में किसी खिलाड़ी को फिक्सिंग के लिए संपर्क किया जाता है। गांगुली ने बताया कि उन्होंने सीधे सचिन तेंदुलकर से पूछा था कि क्या कभी किसी ने उन्हें इस तरह के काम के लिए संपर्क किया है। सचिन का जवाब साफ तौर पर “नहीं” था। इसके बाद उन्होंने अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ से भी यही सवाल किया और सभी ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया। गांगुली ने कहा कि यह उनके लिए राहत की बात थी कि टीम के मुख्य खिलाड़ी इन विवादों से पूरी तरह दूर थे। उन्होंने यह भी बताया कि कप्तानी संभालना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि टीम में ऐसे दिग्गज खिलाड़ी मौजूद थे जिनकी कप्तानी में वह खुद खेल चुके थे। मोहम्मद अजहरुद्दीन और सचिन तेंदुलकर जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों के सामने पहली टीम मीटिंग लेने से पहले वह काफी घबराए हुए थे। उन्होंने अपनी पत्नी डोना से भी इस चिंता का जिक्र किया था कि वह इतने बड़े खिलाड़ियों को कैसे निर्देश देंगे। गांगुली ने बताया कि कोच्चि में अपने पहले मैच से पहले उन्होंने टीम मीटिंग को केवल 15 मिनट में खत्म कर दिया ताकि माहौल सहज बना रहे। उनकी कप्तानी का असर जल्द ही मैदान पर दिखने लगा। भारत ने पहला मैच जीता और अगले मुकाबले में गांगुली ने खुद शतक जड़ा। यहीं से भारतीय क्रिकेट में “दादा युग” की शुरुआत मानी जाती है। गांगुली ने अपनी कप्तानी के दौरान कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया, जिनमें युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, हरभजन सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे नाम शामिल रहे। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने विदेशों में जीत दर्ज करना सीखा और 2003 विश्व कप फाइनल तक का सफर तय किया। क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि गांगुली ने उस दौर में भारतीय क्रिकेट को नई पहचान और आत्मविश्वास दिया। डेविड/ईएमएस 17 मई 2026