कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखा पत्र नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर घमासान जारी है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर चिंता जताई है। रमेश ने इकोलॉजिकल नुकसान का जिक्र किया है। साथ ही उन्होंने आदिवासी समुदायों के भावना के उल्लंघन की बात कही। बता दें ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में शुरू किया जा रहा करीब 92,000 करोड़ रुपए का मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इस परियोजना में एक बड़ा इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक नया आधुनिक शहर और 450 मेगावाट का गैस व सौर ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री को पत्र लिखते हुए कहा कि 1 मई 2026 को भारत सरकार ने द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट शीर्षक से एक एफएक्यू जारी किया था। इसके बाद 10 मई 2026 को मैंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री को लिखा था कि ये एफएक्यू परियोजना को मिली पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर पूरी तरह भ्रामक तस्वीर पेश करते हैं, जो असल में बेहद संदिग्ध आधारों पर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि 13 मई 2026 को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को भी पत्र लिखा था कि ये एफएक्यू परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया के तहत प्रावधानों के पालन की स्थिति को पूरी तरह गलत तरीके से प्रस्तुत करते हैं, जबकि असल में यह प्रक्रिया संसद द्वारा आदिवासी समुदायों को दिए गए व्यक्तिगत और सामूहिक अधिकारों का भावना और शब्द दोनों स्तरों पर खुला उल्लंघन करती है। उन्होंने पत्र में लिखा कि मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि हमारे देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की जरुरत पर कोई दो राय नहीं हो सकती। भारत की रणनीतिक क्षमताओं को विश्वसनीय तरीके से प्रदर्शित करने की जरूरत पर भी कोई मतभेद नहीं है। फिर भी, मैं आपके विचारार्थ निम्नलिखित बातें प्रस्तुत करना चाहता हूं। ग्रेट निकोबार द्वीप के कैंपबेल वे में स्थित आईएनएस बाज को जुलाई 2012 में कमीशन किया गया था, लेकिन मौजूदा रनवे की लंबाई को कम से कम तीन गुना बढ़ाने और एक नौसैनिक जेट्टी बनाने की योजनाएं करीब पांच सालों से मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इन योजनाओं के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव भी कहीं कम हैं। सिराज/ईएमएस 17मई26