क्षेत्रीय
18-May-2026
...


- उम्मीद, विश्वास और जिंदगी की वापसी की प्रेरणादायक कहानी राजनांदगांव (ईएमएस)। कहते हैं कि जब उम्मीदें टूटने लगती हैं तब एक सही इलाज और डॉक्टरों की मेहनत किसी चमत्कार से कम नहीं होती। ऐसा ही एक प्रेरणादायक मामला नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल राजनांदगांव में सामने आया जहां लकवा (स्ट्रोक) से जूझ रहे एक मरीज को नया जीवन मिला। महरूमखुर्द बेलकाडीह निवासी मरीज को 17 अप्रैल 2026 शुक्रवार दोपहर लगभग 1:30 बजे गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया। मरीज पूरी तरह बेहोश था और परिजन लगभग उम्मीद खो चुके थे। बताया गया कि मरीज को करीब एक दिन तक अचेत अवस्था में रखने के बाद अस्पताल पहुंचाया गया था। उस समय मरीज का रक्तचाप नहीं आ रहा था तथा शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा भी बेहद कम थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि मरीज की जिंदगी बचाना एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी। परिजनों ने बताया कि उन्हें लगने लगा था कि अब मरीज को बचाना संभव नहीं है लेकिन नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. साहू एवं उनकी टीम ने लगातार पांच दिनों तक मरीज का 24 घंटे निगरानी में इलाज किया। मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और सही समय पर उचित दवाइयों तथा आधुनिक उपचार पद्धति से इलाज किया गया। करीब दस दिनों तक मरीज का मेडिसीन एवं फिजियोथैरेपी के माध्यम से विशेष उपचार किया गया। डॉक्टरों की मेहनत, समर्पण और सही चिकित्सा का परिणाम यह रहा कि लकवा की गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीज ने धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ लेना शुरू कर दिया। आज वही मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलकर घर लौट रहा है। मरीज की बहन ने भावुक होकर कहा हमने तो मरीज को खो दिया था लेकिन यहां उसे नया जीवन मिला है। डॉ. साहू ने बताया कि लकवा के मरीजों के लिए शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मरीज को 4 से 5 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो थ्रोम्बोलाइसिस प्रक्रिया के माध्यम से दिमाग में रक्त प्रवाह दोबारा शुरू किया जा सकता है। वहीं यदि मरीज 12 घंटे के भीतर पहुंचता है तो थ्रोम्बेक्टॉमी तकनीक से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को पुनः स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि मस्तिष्क में तीन मिनट तक ऑक्सीजन का प्रवाह बंद हो जाए तो हाइपोक्सिक क्षति होने का खतरा बढ़ जाता है जिससे मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए लकवा के लक्षण दिखाई देते ही मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना बेहद जरूरी है। डॉ. साहू ने कहा कि लकवा के मरीजों के लिए दवाइयों के साथ-साथ फिजियोथैरेपी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिससे मरीज तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की यह सफलता न केवल एक मरीज के जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है बल्कि यह साबित करती है कि सही समय पर इलाज और डॉक्टरों की अथक मेहनत कई जिंदगियां बचा सकती है। ईएमएस/मोहने/ 18 मई 2026