- खजराना गणेश मंदिर में शिव विवाह उत्सव पर झूमे श्रद्धालु, आज सुनाया जाएगा वामन अवतार प्रसंग इंदौर (ईएमएस)। कलियुग में श्रीमद्भागवत जैसी साक्षात भगवान की वाणी का श्रवण मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। पुरुषोत्तम मास जैसे पावन प्रसंग में भागवत कथा सुनना भक्ति की प्यास को बढ़ाने वाला कर्म है। भागवत भारत भूमि का एकमात्र ऐसा विलक्षण ग्रंथ है जिसे हजारों बार सुनने के बाद भी नित्य नूतन अनुभूति होती है। भागवत और रामायण भारत की अनमोल धरोहर हैं। भक्ति में समर्पण जरूरी है। भगवान शिव यदि श्रद्धा हैं, तो माता पार्वती विश्वास। इस संपूर्ण सृष्टि का संचालन श्रद्धा और विश्वास के इन्हीं दो स्तंभों पर टिका हुआ है। ये प्रेरक विचार भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने व्यक्त किए। वे सोमवार शाम को खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में सप्तऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ में बोल रहे थे। कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का भव्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान शिवजी की अनूठी बारात निकाली गई, जिसमें भूत, पिशाच और डाकिन के स्वांग रचे श्रद्धालु शामिल हुए। कथा शुभारंभ के पूर्व मनोरथी समूह के आशीष-खनक शर्मा, हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल, महेंद्र-दिव्या मानधन्या, अशोक-आरती खंडेलवाल, रामचंद्र-उषा पितलिया एवं लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो ने व्यास पीठ का पूजन किया। सोमवार को सभी श्रद्धालु तय ड्रेस कोड के अनुसार नीले परिधानों में शामिल हुए। :: आज होगा वामन अवतार और जानिए आगे के उत्सवों का ड्रेस कोड :: आयोजन समिति के अनुसार, मंगलवार से कथा प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक होगी। कथा में हर दिन के लिए विशेष रंग (ड्रेस कोड) तय किए गए हैं। मंगलवार 19 मई को वामन अवतार प्रसंग में श्रद्धालु लहरिया और पिंक रानी कलर के परिधान में आएंगे। इसके बाद बुधवार 20 मई को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर सभी भक्त पीतांबर (पीले) रंग की पोशाक पहनेंगे। गुरुवार 21 मई को गोवर्धन पूजा उत्सव के दिन महिला-पुरुष हरे रंग के ड्रेस कोड में शामिल होंगे। शुक्रवार 22 मई को रुक्मणी विवाह उत्सव के दिन श्रद्धालु अपनी पसंद के सुंदर परिधानों में सज-धजकर आएंगे। समापन के अंतिम दिन शनिवार 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और कथा विश्राम के प्रसंग में सभी लाल रंग के परिधान धारण करेंगे। :: संस्कारों से ही बचेंगे बिखरते परिवार :: पं. तिवारी ने कहा कि आज भौतिक संसाधनों की आपाधापी में मनुष्य भटक रहा है। परिवार बिखर रहे हैं और रिश्तों में दरारें आ रही हैं। इसका मुख्य कारण संस्कारों और संस्कृति से दूरी है। हमारी नई पीढ़ी को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की भी जरूरत है, जो भागवत, रामायण और गीता जैसे दिव्य ग्रंथों से ही मिल सकते हैं। यदि जीवन की महाभारत को जीतना है, तो अर्जुन की तरह हमें भी अपने जीवन रूपी रथ की चाबी श्रीकृष्ण के हाथों में सौंप देनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी पूर्व में दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, मलेशिया और वियतनाम सहित देश-विदेश के कई प्रमुख स्थलों पर सनातन धर्म की पताका फहरा चुके हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए कथा स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए कूलर, शीतल पेय और बैठक व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रकाश/18 मई 2026