क्षेत्रीय
18-May-2026
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- अवैध खनन का बहाना या बदले की कार्रवाई? एक को नोटिस, दूसरे का किया तबादला - अफरशाही के चलते वनरक्षकों का टूट रहा मनोबल - पूर्व में एक कर्मचारी को किया जा चुका है निलंबित बालाघाट (ईएमएस). लामता वन परिक्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। यहां नियम-कानून नहीं, बल्कि ‘मनमर्जी’ चलने के आरोप लग रहे हैं। हालात यह हैं कि जो कर्मचारी आवाज उठाते हैं, वही कार्रवाई की जद में आ जाते हैं। बदले की भावना से फिर दो कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है, एक वनरक्षक को नोटिस जारी किया गया है तो दूसरे का तबादला कर दिया गया है। इस घटनाक्रम ने विभाग के भीतर खौफ और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। लामता वन परिक्षेत्र में वनरक्षकों पर कार्रवाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुढियागांव बीट में पदस्थ वनरक्षक सुरेंद्र रंगारे को अवैध खनन के मामले में नोटिस थमा दिया गया। वहीं महकापाठा बीट के वनरक्षक चंद्रशेखर शुक्ला का अचानक तबादला कर पश्चिम बैहर सामान्य परिक्षेत्र के परसाटोला वनचौकी भेज दिया गया। विभाग इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन अंदरखाने इसे ‘सज़ा’ के तौर पर देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व लामता बीट में पदस्थ वनरक्षक शरीफ खान को अनुपस्थित बताकर मार्च माह में दो दिनों का वेतन काट दिया गया। वहीं मवेशी मालिकों से पैसे मांगने के आरोप में बगैर नोटिस जारी किए उन्हें निलंबित भी कर दिया गया। इस तरह से लामता वन परिक्षेत्र में अभी तक तीन कर्मचारियों पर बदले की भावना से कार्यवाही की गई है। विदित हो कि लामता वन परिक्षेत्र में पदस्थ परिक्षेत्र सहायक वनपाल नीतू गोस्वामी के खिलाफ 6 वनरक्षकों ने लिखित शिकायत कर उन्हें हटाने की मांग की थी। यह शिकायत डीएफओ से बीते दिनों की गई थी। शिकायत में परिक्षेत्र सहायक द्वारा मानसिक रुप से प्रताडि़त करने और व्यक्तिगत छबि को धुमिल करने के आरोप लगाए गए थे। इसी मामले में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी परिक्षेत्र सहायक को बचाकर वनरक्षक जैसे छोटे कर्मचारियों के खिलाफ लागातार कार्यवाही कर रहे हैं। जानकार भी अनजान बन बैठे हैं वरिष्ठ अधिकारी वन अमले का आरोप है कि परिक्षेत्र सहायक (वनपाल) की तानाशाही अपने चरम पर है। छोटे कर्मचारियों को लगातार दबाया जा रहा है और जो भी उनके खिलाफ शिकायत करता है, उसे निशाना बना लिया जाता है। सबसे गंभीर बात यह है कि वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले से अवगत होने के बावजूद चुप्पी साधे हुए हैं। इससे यह संदेश जा रहा है कि विभाग में ‘ऊपर से संरक्षण’ प्राप्त है, जिसके चलते मनमानी कार्रवाई जारी है। नियमों से नहीं बल्कि डर में हो रहे कार्य कर्मचारियों का कहना है कि वन परिक्षेत्र लामता अब नियमों से नहीं, बल्कि दबाव और डर से संचालित हो रहा है। लालफीताशाही इतनी हावी हो चुकी है कि निष्पक्ष कार्य करने वाले कर्मचारियों का काम करना मुश्किल हो गया है। अगर यही हालात बने रहे तो वन विभाग में ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारी या तो चुप हो जाएंगे या सिस्टम से बाहर हो जाएंगे और इसका खामियाजा सीधे वन सुरक्षा और संसाधनों को भुगतना पड़ेगा। अवैध खनन में लापरवाही या बलि का बकरा? वनरक्षक से मांगा जवाब जानकारी के अनुसार, उपवनमण्डलाधिकारी उकवा के पत्र के आधार पर परिक्षेत्र अधिकारी उत्तर लामता द्वारा बुढियागांव बीट में पदस्थ वनरक्षक सुरेंद्र रंगारे को नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस 2 अप्रैल को जारी किया गया, जो 13 अप्रैल को संबंधित कर्मचारी को प्राप्त हुआ। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि 20-21 फरवरी की रात मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि बुढियागांव बीट क्षेत्र में एक जेसीबी और तीन ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर परिक्षेत्र अधिकारी और परिक्षेत्र सहायक को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। प्रारंभिक सूचना में वाहनों को मौके पर पकडऩे की बात कही गई, लेकिन बाद में वन एवं राजस्व क्षेत्र की सीमा स्पष्ट नहीं होने का हवाला देकर वाहनों को छोड़ दिया गया। हालांकि, बाद में जीपीएस रीडिंग और सीमा मिलान में यह स्पष्ट हुआ कि घटना स्थल वन क्षेत्र के अंतर्गत ही आता है। इसके बावजूद अवैध उत्खनन में संलिप्त जेसीबी और ट्रैक्टरों के खिलाफ न तो अपराध दर्ज किया गया और न ही जब्ती की कार्रवाई की गई। नोटिस में इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और शासकीय कार्यों में लापरवाही बताया गया है। साथ ही वनरक्षक से 7 दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह कार्रवाई तथ्यों के आधार पर नहीं, बल्कि द्वेष की भावना से प्रेरित है। प्रशासनिक कार्य व्यवस्था का हवाला या द्वेषपूर्ण किया तबादला वन विभाग में प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल करते हुए महकापाठा बीट में पदस्थ वनरक्षक चंद्रशेखर शुक्ला को पश्चिम बैहर परिक्षेत्र के परसाटोला वनचौकी में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार शासकीय कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। आदेश के अनुसार, उत्तर लामता (सामान्य) परिक्षेत्र के महकापाठा बीट भाग-1 एवं 2 में पदस्थ वनरक्षक चंद्रशेखर शुक्ला को पश्चिम बैहर (सामान्य) परिक्षेत्र अंतर्गत वनचौकी परसाटोला में आगामी आदेश तक कार्य आवंटित किया गया है। विभाग ने इस बदलाव को पूरी तरह प्रशासनिक आवश्यकता और कार्य सुगमता से जोडकऱ देखा है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इस तबादले को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। भानेश साकुरे / 18 मई 2026