राज्य
18-May-2026
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पटना, (ईएमएस)। जद (यू) के प्रदेश प्रवक्ता सह विधान पार्षद नीरज कुमार, प्रदेश प्रवक्ता डॉ.निहोरा प्रसाद यादव एवं प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा ने संयुक्त प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय जनता दल द्वारा स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पर की जा रही व्यक्तिगत टिप्पणियों पर तीखा हमला बोला। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि आरजेडी की यह बयानबाजी उसकी राजनीतिक घबराहट और बेचैनी को दर्शाती है। ‘जय निशांत तय निशांत’ जद (यू) का नारा है और निशांत कुमार आज पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं। उनकी ‘‘सद्भाव यात्रा’’ के दौरान बिहार की जनता ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया, उससे स्पष्ट हो गया कि जनता और कार्यकर्ताओं के दिलों में उनके प्रति गहरा सम्मान और विश्वास है। निशांत कुमार ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के आग्रह पर राजनीति एवं मंत्री पद की जिम्मेदारी स्वीकार की। जिस प्रकार लालू प्रसाद यादव ने सार्वजनिक मंच से तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, वैसी कोई परिस्थिति जद (यू) में कभी नहीं रही। निशांत कुमार के संस्कार, सादगी और समर्पण को बिहार की जनता देख रही है। नीतीश कुमार ने न तो कभी सार्वजनिक रूप से निशांत कुमार को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और न ही उनकी कोई ताजपोशी की गई। हकीकत तो ये है कि निशांत कुमार की लोकप्रियता से आरजेडी घबरा गई है और उसे भविष्य की राजनीति में उसे अंधेरा दिखाई देने लगा है। इसी डर से आरजेडी उनपर अनर्गल आरोप लगा रही है। स्वास्थ्य मंत्री का पद संभालते ही निशांत कुमार ने जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उनके फैसले यह साबित करते हैं कि बिहार की जनता का हित और कल्याण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आयुष्मान कार्ड योजना के दायरे को विस्तारित करने का निर्णय इस बात का प्रमाण है कि वे राज्य के गरीब, वंचित एवं कमजोर वर्गों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर और संवेदनशील हैं। आरजेडी को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि उसे निशांत कुमार के खिलाफ अनर्गल और व्यक्तिगत टिप्पणियों से परहेज करना चाहिए। आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा 11 मई को किए गए ट्वीट का उल्लेख करते हुए प्रवक्ताओं ने कहा कि एक ओर आरजेडी के नेता निशांत कुमार पर निजी हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता इस तरह की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए इससे बचने की सलाह दे रहे हैं। जद (यू) नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर आरजेडी के भीतर यह कैसा विरोधाभास है? निशांत कुमार ने किसी पर व्यक्तिगत एवं किसी परिवार पर टिप्पणियां नहीं की ये उनकी सादगी का प्रमाण है जबकि दूसरी तरफ तेजस्वी यादव ने उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां की और आरोप लगाए। दरअसल यही फर्क होता है संस्कार का, निशांत कुमार अपनी सादगी से जनता का दिल जीतने का काम करते हैं, वो तेजस्वी यादव की तरह मुरेठा बांधकर लोगों को डराते नहीं हैं। तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आप मुरेठा बांधते रहिए निशांत कुमार अपनी सादगी से जनता का दिल जीत लेते हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा यह आरोप लगाए जाने पर कि बिना किसी सदन के सदस्य बने निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया, जद (यू) प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव को यह सवाल उठाने से पहले अपने माता-पिता से जवाब मांगना चाहिए। वर्ष 1997 में जब चारा घोटाले के आरोप में लालू प्रसाद यादव को जेल जाना पड़ा था, तब राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया था, जबकि उस समय वे किसी भी सदन की सदस्य नहीं थीं। तेजस्वी यादव को निशांत कुमार पर सवाल उठाने से पहले अपने माता-पिता के 15 सालों के विकास कार्यों के बारे में जनता को बताना चाहिए। आरजेडी को स्वस्थ राजनीतिक संवाद की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए और व्यक्तिगत टिप्पणी की राजनीति से बचना चाहिए। संतोष झा- १८ मई/२०२६/ईएमएस