- केन-बेतवा परियोजना से प्रभावितों का उचित मुआवजा दिए जाने की मांग, आदिवासी कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन बालाघाट (ईएमएस). छतरपुर और पन्ना जिलों में प्रस्तावित केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वहीं, आंदोलन में शामिल नेताओं पर दर्ज एफआईआर और ओंकारेश्वर क्षेत्र में की जा रही कार्रवाई ने मामले को और तूल दे दिया है। सोमवार को आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष धरम सिंह मरकाम के नेतृत्व में राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन अपर कलेक्टर जीएस धुर्वे को ज्ञापन सौंपा गया है। आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष धरम सिंह मरकाम ने बताया कि मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में प्रस्तावित केन-बेतवा लिंक परियोजना के चलते कई गांवों के लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है। छतरपुर जिले के 22 और पन्ना जिले के 12 गांवों के निवासियों को बेदखली के आदेश जारी किए गए हैं। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि पुनर्वास की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और ग्राम सभाओं को नजरअंदाज किया गया। प्रभावित का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के नियमों का पालन नहीं हुआ और उन्हें पर्याप्त मुआवजा भी नहीं दिया गया। इन मुद्दों को लेकर प्रभावित परिवारों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। पूर्व में ग्रामीणों ने 12 दिनों तक अनशन कर अपनी मांगें रखीं थीं, जिस पर प्रशासन ने दोबारा सर्वे और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अखिल आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और पन्ना में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के माध्यम से समाधान की मांग की। इसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी परियोजना क्षेत्र पहुंचे और पीडि़तों से संवाद कर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करते हुए न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। हालांकि, इस आंदोलन में शामिल जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने से विवाद और बढ़ गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है और सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। ज्ञापन के माध्यम से पीडि़त परिवारों को न्याय दिए जाने और नियम विरुद्ध जनप्रतिनिधियों पर की गई कार्यवाही को शून्य किए जाने की मांग की है। इस अवसर पर उर्मिला वरकड़े, गौरव परते, शरद लाल, रोहित मरकाम, नीलम सिंह मरकाम, महेश्वर मेरावी, वीनिता वीके, यूएस मसराम सहित अन्य कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद थे। भानेश साकुरे / 18 मई 2026