राष्ट्रीय
19-May-2026
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-सतीशन कैबिनेट से साधा जाति-धर्म और क्षेत्रीय संतुलन -यूडीएफ सरकार में सहयोगी दलों को मिला प्रतिनिधित्व नई दिल्ली,(ईएमएस)। केरल में एक दशक बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व में ऐसा मंत्रिमंडल तैयार किया है, जिसे राजनीतिक जानकार “सोशल इंजीनियरिंग का मॉडल” मान रहे हैं। सोमवार को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि उनके साथ 20 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल में कांग्रेस ने जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है। कांग्रेस कोटे से 11 मंत्री बनाए गए हैं, जबकि सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को पांच मंत्री पद दिए गए हैं। इसके अलावा केरल कांग्रेस के विभिन्न गुटों और आरएसपी को भी प्रतिनिधित्व मिला है। सतीशन सरकार में सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। मंत्रिमंडल में कुल 9 हिंदू, 6 मुस्लिम और 5 ईसाई नेताओं को शामिल किया गया है। प्रभावशाली नायर समुदाय से मुख्यमंत्री वीडी सतीशन सहित चार नेताओं को जगह देकर कांग्रेस ने सवर्ण हिंदू मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। वहीं ईझावा और अन्य पिछड़ा वर्ग से भी नेताओं को मंत्री बनाकर ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने का संदेश दिया गया है। दलित समुदाय से एपी अनिल कुमार और के.ए. थुलसी को कैबिनेट में शामिल किया गया है। क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी कांग्रेस ने उत्तर के मलबार क्षेत्र से लेकर दक्षिण के त्रावणकोर तक सभी इलाकों को प्रतिनिधित्व दिया है। मलबार क्षेत्र से सनी जोसेफ और टी. सिद्दीकी जैसे नेताओं को शामिल कर पार्टी ने वहां अपने मजबूत प्रदर्शन को और मजबूती देने का प्रयास किया है। वहीं दक्षिणी केरल से रमेश चेन्नितला और पीसी विष्णुनाथ जैसे नेताओं को मंत्री बनाकर त्रावणकोर क्षेत्र में संतुलन साधा गया है। मुस्लिम मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए आईयूएमएल को पांच कैबिनेट पद दिए गए हैं। वहीं ईसाई वोट बैंक को साधने के लिए कांग्रेस और सहयोगी दलों के कई ईसाई नेताओं को सरकार में शामिल किया गया है। इस मंत्रिमंडल की एक और खासियत अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन है। 21 मंत्रियों में 14 पहली बार मंत्री बने हैं, जबकि सात अनुभवी नेताओं को भी जगह दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस ने इस कैबिनेट के जरिए न सिर्फ अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने, बल्कि एलडीएफ के सामाजिक आधार में भी सेंध लगाने की रणनीति तैयार की है। हिदायत/ईएमएस 19 मई 2026