-यह विमान एक साथ 70 सैनिकों, 48 पैराट्रूपर्स, 24 स्ट्रेचर ले जाने में सक्षम नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत ने स्वदेशी सैन्य विमान निर्माण के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा और एयरबस संयंत्र में तैयार किया गया पहला स्वदेश में निर्मित सी-295 परिवहन विमान अब अपनी पहली परीक्षण उड़ान के लिए तैयार है। इसे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। बता दें भारतीय वायु सेना के उप वायु प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने हाल ही में वडोदरा स्थित अंतिम संयोजन इकाई का दौरा कर इस परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। भारतीय वायु सेना ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि यह विमान अब पहली उड़ान की तैयारी के अंतिम चरण में है। बता दें वडोदरा स्थित इस अत्याधुनिक संयंत्र का उद्घाटन 28 अक्टूबर 2024 को पीएम मोदी और स्पेन के पीएम पेद्रो सांचेज ने संयुक्त रूप से किया था। भारत ने स्पेन के साथ करीब 21 हजार 935 करोड़ रुपए का समझौता कर कुल 56 सी-295 परिवहन विमानों की खरीद का निर्णय लिया है। इनमें से 16 विमान सीधे स्पेन से तैयार अवस्था में भारत को दिए जा रहे हैं, जबकि बाकी 40 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। सरकार इस परियोजना को मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक बडी सफलता के रूप में देख रही है। वैसे लंबे समय से भारत अपनी सैन्य विमान जरूरतों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर है, लेकिन इस परियोजना से देश को आधुनिक रक्षा तकनीक और विमान निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय रक्षा उद्योग को नई दिशा मिलेगी और देश में रोजगार और तकनीकी कौशल का भी विस्तार होगा। बता दें सी-295 एक मध्यम श्रेणी का सामरिक सैन्य परिवहन विमान है, जिसे सैनिकों की आवाजाही, माल ढुलाई, चिकित्सा निकासी और विशेष सैन्य अभियानों के लिए तैयार किया है। यह विमान एक साथ 70 सैनिकों, 48 पैराट्रूपर्स या 24 चिकित्सा स्ट्रेचर को ले जाने में सक्षम है। भारतीय वायु सेना के पुराने एव्रो-748 विमानों की जगह अब यही आधुनिक विमान लेगा। इस विमान में दो शक्तिशाली टर्बोप्रॉप इंजन लगाए गए हैं, जिनकी मदद से यह छोटे और कठिन हवाई पट्टियों से भी उड़ान भर सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ऊबड़ खाबड़, अर्धविकसित और छोटी हवाई पट्टियों पर भी आसानी से संचालन कर सकता है। यही कारण है कि इसे भारत की सामरिक जरूरतों के अनुरूप बेहद उपयुक्त माना जा रहा है, खासकर पहाड़ी इलाकों और दूरस्थ अग्रिम सैन्य ठिकानों के लिए। बता दें मोदी सरकार लगातार तीनों सेनाओं को आधुनिक बनाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। सरकार की कोशिश है कि देश की सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम हो और ज्यादा से ज्यादा रक्षा उपकरणों का निर्माण भारत में ही किया जाए। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के तहत युद्धक विमान, हेलीकाप्टर, मिसाइल, तोप और अन्य आधुनिक सैन्य प्रणालियों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। सी-295 विमान परियोजना को इसी नीति का अहम उदाहरण है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की इन नीतियों के सुखद परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं और भारत तेजी से रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है। सिराज/ईएमएस 19 मई 2026