युद्ध ईरान - इजराइल अमेरिका का युद्ध में इतना गंभीर समस्या नहीं है कि कोरोना जैसी आपदा नहीं है उसमें जवान बूढ़े बच्चे सब मर रहें थे लाशों का अम्बार लगा था सनातन धर्म में इस आपदा से निपटने के लिए भौतिक सुखों का त्याग कर दीजिये आपदा ख़त्म हो जाएगी उस समय का माहौल अलग था अभी वैसा माहौल नहीं है वो महामारी थी ऐ आर्थिक संकट है भारत ऐसे भी भगवान राम को मानने वाला त्याग और संघर्ष वाले लोग हैं पेट्रोल ख़त्म हो गया तो इसमें चिंता करने की क्या जरुरत है आपका पैर जिन्दा है जब भगवान राम ने 14 वर्ष पैदल चलकर वन में बिताये तो क्या हम पैदल भी नहीं चल सकते सेहत के लिए पैदल चलना तो और सही है बहुत दूर है तो साइकिल से चल देंगे इससे भी सेहत और तंदरुस्त रहेगा बहुत लोग हैं तो बैलगाड़ी या टमटम से चलेंगे ज्यादा धुप है तो छाता या पेड़ की छाव में आराम कर लेंगे और भी दूर है तो नाव से नदी पार कर एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर जा साकते है आज सभी को इस संकट की घड़ी में प्रभु राम से सिखने की जरुरत है प्रभु श्री राम का वनवास हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथ रामायण की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। पिता राजा दशरथ के वचन की रक्षा के लिए श्री राम, अपनी पत्नी माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ १४ वर्षों के लिए वन गए। यहाँ इस संपूर्ण प्रसंग के मुख्य बिंदु दिए गए हैं: वनवास के मुख्य कारण कैकेयी के वरदान: राजा दशरथ ने अपनी प्रिय रानी कैकेयी को दो वरदान दिए थे। मंथरा के उकसाने पर, कैकेयी ने इन्हीं वरदानों का उपयोग करते हुए भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और श्रीराम के लिए १४ वर्ष का वनवास माँगा। पिता का वचन: राजा दशरथ ने अपने वचन का मान रखने के लिए भारी मन से राम को वन जाने का आदेश दिया। एक आदर्श पुत्र के रूप में राम ने सहर्ष पिता की आज्ञा का पालन किया वन गमन के दौरान प्रभु राम ने कई स्थानों की यात्रा की और ऋषियों-मुनियों से आशीर्वाद प्राप्त किया : तमसा नदी: अयोध्या छोड़ने के बाद पहली रात यहीं बिताई। श्रृंगवेरपुर: यहाँ उन्होंने गंगा नदी पार की और निषादराज गुह से भेंट की। चित्रकूट: यहाँ राम ने अपने भाई भरत से भेंट की, जो उन्हें वापस अयोध्या ले जाने आए थे। भरत ने राम की चरण-पादुका लेकर राज्य का संचालन किया। दंडकारण्य: चित्रकूट के बाद राम, सीता और लक्ष्मण ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के घने जंगलों, दंडकारण्य में लंबा समय बिताया। यहीं पर पंचवटी में उन्होंने अपनी कुटिया बनाई। किष्किंधा: यहीं पर हनुमान जी और सुग्रीव से उनकी भेंट हुई और सीता माता की खोज के लिए वानर सेना का गठन हुआ। वनवास के अंतिम चरण में लंकापति रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया, जिसके बाद प्रभु राम ने सुग्रीव और हनुमान जी की मदद से रावण की लंका पर आक्रमण किया। रावण वध: राम-रावण युद्ध में धर्म की जीत हुई और रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया गया। अयोध्या आगमन: १४ वर्ष का वनवास पूर्ण कर प्रभु राम, सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए, जिसे आज हम दीपावली के रूप में मनाते हैं। राम का वनवास केवल एक सजा नहीं, बल्कि उनके आदर्श चरित्र, धर्म की स्थापना और राक्षसों के विनाश का माध्यम था इसतरह जब भी क़ोई संकट हो तो उससे कभी घबराना नहीं चाहिए ईश्वर को याद कीजिये सब ठीक होगा आखिर ऐ सब लीला भगवान ने इसलिए रची ताकि समय के अनुसार अपने को बदले और सुःख, दुःख, आपदा, विपत्ति इन सबसे विचलित नहीं होना चाहिए.कोरोना ऐसी आपदा नहीं कहना प्रधानमंत्री जी का जो भी इशारा हो लेकिन मेरे अनुसार ऐ एक महामारी नहीं आपदा है जो समय का चक्र है इससे परेशान ना हो। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 21 मई /2026