मनोरंजन
21-May-2026
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मुंबई (ईएमएस)। दिग्गज अभिनेत्री नीतू कपूर की फिल्म इंडस्ट्री में वापसी की टीवी अभिनेत्री रुबीना दिलैक ने खुलकर सराहना की है। एक्ट्रेस रुबीना ने कहा कि वह नीतू कपूर की जिंदगी और उनके संघर्षों से खुद को गहराई से जोड़कर देखती हैं। उन्होंने कहा कि नीतू कपूर ने यह साबित कर दिया है कि जिंदगी में बड़े बदलावों के बाद भी महिलाएं दोबारा अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं और नई शुरुआत कर सकती हैं। एक महिला, मां और कामकाजी प्रोफेशनल के तौर पर नीतू कपूर की वापसी उन्हें बेहद प्रेरित करती है। हाल ही में एक बातचीत के दौरान रुबीना ने कहा कि नीतू कपूर सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बल्कि साहस और आत्मविश्वास की भी मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि सालों से लोगों ने देखा है कि नीतू कपूर ने जीवन की हर चुनौती का मजबूती से सामना किया है। पति ऋषि कपूर के निधन के बाद उनका दोबारा फिल्मों में लौटना कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। रुबीना का मानना है कि महिलाओं को इसी तरह आगे बढ़कर समाज में अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए। रुबीना ने कहा कि मां बनने या जिंदगी में बड़े बदलाव आने के बाद अक्सर महिलाएं अपने करियर को लेकर असमंजस में रहती हैं, लेकिन नीतू कपूर ने यह दिखा दिया कि अगर इच्छा और आत्मविश्वास हो तो वापसी हमेशा संभव है। उन्होंने कहा कि नीतू कपूर ने महिलाओं के लिए एक नया मानदंड स्थापित किया है और यह संदेश दिया है कि उम्र या परिस्थितियां किसी महिला की पहचान तय नहीं करतीं। अभिनेत्री ने नीतू कपूर की उस बात का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी वापसी सिर्फ काम करने के लिए नहीं थी, बल्कि यह जानने के लिए थी कि क्या इतने सालों बाद भी कैमरे के सामने उनका आत्मविश्वास कायम है। रुबीना ने इसे बेहद प्रेरणादायक बताया और कहा कि हर इंसान को समय-समय पर खुद को परखना चाहिए। इस दौरान रुबीना ने अपने पति अभिनव शुक्ला की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि अभिनव घर पर रहकर उनके जुड़वां बच्चों की देखभाल कर रहे हैं ताकि वह अपने करियर पर ध्यान दे सकें। रुबीना ने कहा कि किसी पुरुष का अपने अहंकार को किनारे रखकर पत्नी के सपनों का समर्थन करना बहुत बड़ी बात है। उनके मुताबिक, वही असली साथी होता है जो अपने जीवनसाथी के सपनों का सम्मान करे और उन्हें पूरा करने में मदद करे। रुबीना ने यह भी कहा कि वह और अभिनव मिलकर समाज की पुरानी सोच और रूढ़ियों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों अपनी बेटियों को ऐसी परवरिश देना चाहते हैं जहां महिलाओं और पुरुषों के लिए तय पारंपरिक भूमिकाओं की कोई सीमा न हो। सुदामा/ईएमएस 21 मई 2026