नई दिल्ली (ईएमएस)। तेज धूप और लू के कारण पौधों में “हीट स्ट्रेस” की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनकी ग्रोथ प्रभावित हो रही है और कई पौधे समय से पहले सूखने लगे हैं। लगातार बढ़ते तापमान का असर अब केवल इंसानों और पशुओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि घरों के किचन गार्डन और गमलों में लगे पौधे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पौधों की सही देखभाल नहीं की गई तो फूल, फल और सब्जियों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी गमलों में लगे पौधों को होती है। तेज तापमान के कारण गमलों की मिट्टी बहुत जल्दी सूख जाती है और जड़ों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती। इसका असर सबसे पहले पौधों की पत्तियों पर दिखाई देता है। पत्तियां मुरझाने लगती हैं और कई बार उनके किनारे जले हुए जैसे नजर आते हैं। लगातार पानी की कमी रहने पर पौधों की वृद्धि रुक जाती है और वे धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। जानकार बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी का असर केवल पौधों की पत्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि फूल और छोटे फल भी तेजी से झड़ने लगते हैं। इससे पौधों की उत्पादकता कम हो जाती है। किचन गार्डन में उगाई जाने वाली सब्जियों और फलदार पौधों पर इसका सीधा असर देखने को मिलता है। ऐसे में जो लोग घरों में सब्जियां और पौधे उगाने का शौक रखते हैं, उन्हें गर्मियों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों को लू और तेज गर्मी से बचाने के लिए सबसे जरूरी है सही समय पर सिंचाई करना। पौधों को सुबह जल्दी या शाम के समय पानी देना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इस समय तापमान अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे पानी जल्दी नहीं सूखता और जड़ों तक अच्छी तरह पहुंच जाता है। दोपहर के समय पानी देने से मिट्टी जल्दी गर्म हो जाती है और पौधों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती। इसके अलावा पौधों को सीधी धूप से बचाने के लिए शेड नेट, कपड़े या जाल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे तेज धूप और गर्म हवा का असर कम होता है। मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग भी बेहद कारगर उपाय माना जाता है। सूखी घास, पत्तियां या जैविक पदार्थ मिट्टी पर बिछाने से पानी लंबे समय तक बना रहता है और पौधों की जड़ों को ठंडक मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से पौधों को भीषण गर्मी से बचाया जा सकता है। यदि समय-समय पर पानी, पोषण और छाया का ध्यान रखा जाए तो किचन गार्डन के पौधे न केवल सुरक्षित रहेंगे, बल्कि बेहतर तरीके से बढ़ेंगे भी। सुदामा/ईएमएस 21 मई 2026