गुना (ईएमएस)। शहर में लगातार बढ़ रही डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नगर पालिका परिषद गुना द्वारा एक बड़ी और राहत भरी मुहिम शुरू की गई है। नगर पालिका ने शहर के आवारा कुत्तों को पकड़कर उनका विधिवत उपचार करने और नसबंदी के लिए एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कर दिया है। इसके लिए वार्ड क्रमांक 21 स्थित जगनपुर पानी की टंकी के पास एक अत्याधुनिक एबीसी केंद्र बनाया गया है, जहां इन स्ट्रीट डॉग्स को सुरक्षित रखकर उनका उपचार किया जाएगा। - वार्ड 27 से हुई शुरुआत, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिली सफलता नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने बताया कि परिषद द्वारा पिछले एक वर्ष से एबीसी सेंटर शुरू करने के गंभीर प्रयास किए जा रहे थे। शुरुआत में उचित टेंडर न आने के कारण इस प्रक्रिया में कुछ तकनीकी बाधाएं आ रही थीं, जिन्हें अब पूर्ण कर लिया गया है। शहर में बढ़ रहे आवारा कुत्तों के आतंक और आम नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए इस व्यवस्था को लागू करना बेहद अनिवार्य हो गया था। अभियान के पहले दिन वार्ड क्रमांक 27 से लगभग 10 स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ा गया है, जिन्हें वाहन के जरिए उपचार के लिए सीधे एबीसी सेंटर भेजा गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान नेता प्रतिपक्ष शेखर वशिष्ठ, बृजमोहन खरे, अमित आर्य तथा एबीसी सेंटर की टीम प्रमुख रूप से मौजूद रही। एबीसी सेंटर में 7 दिन मिलेंगे वीआईपी इंतजाम, शांत होगा कुत्तों का स्वभाव मुख्य नगर पालिका अधिकारी मंजुषा खत्री ने इस पूरी कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आवारा कुत्तों को उनके ही गली-मोहल्लों के समूहों के अनुसार अलग-अलग गाड़ी में लाया जाएगा और सेंटर में भी इसी तरह रखा जाएगा, ताकि वे आपस में झगड़ा न करें। सेंटर में सबसे पहले योग्य पशु चिकित्सकों की निगरानी में उनका एनिमल बर्थ कंट्रोल (नसबंदी) ऑपरेशन किया जाएगा। इसके बाद सभी नर और मादा कुत्तों को रेबीज रोधी इंजेक्शन लगाए जाएंगे। जिन कुत्तों का यह पूरा उपचार हो जाएगा, उनकी पहचान के लिए उनके कानों पर एक छोटा सा कट (निशान) लगाया जाएगा। ऑपरेशन के बाद सभी कुत्तों को 7 दिनों तक एबीसी सेंटर में ही रखा जाएगा, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उन्हें पौष्टिक और उचित आहार दिया जाएगा। 7 दिन की अवधि पूरी होने और उनके पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद, उन्हें वापस उसी वार्ड या स्थान पर छोड़ दिया जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। खत्म होगा रेबीज का खतरा, आम नागरिक भी ला सकेंगे पालतू डॉग्स इस वैज्ञानिक प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि एबीसी और रेबीज वैक्सीनेशन के बाद कुत्तों के काटने पर भी मनुष्यों में रेबीज फैलने का कोई खतरा नहीं रहेगा। साथ ही, नसबंदी के बाद कुत्तों का खूंखार और आक्रामक व्यवहार पूरी तरह शांत हो जाएगा, जिससे राहगीरों पर अचानक होने वाले हमलों पर रोक लगेगी। इस अभियान के तहत न केवल आवारा कुत्ते, बल्कि आम नागरिक भी अपने पालतू कुत्तों को रेबीज के टीके और नसबंदी के लिए इस केंद्र पर ला सकते हैं। नगर पालिका के इस कदम से गुना जल्द ही डॉग बाइट के खतरे से मुक्त हो सकेगा। - सीताराम नाटानी