नासा के मून मिशन और आईपीओ पर बढ़ी चिंता वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में उस समय बड़ी निराशा हाथ लगी जब एलन मस्क का ड्रीम प्रोजेक्ट स्टारशिप एक बार फिर लॉन्च पैड पर ही अटक गया। दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली इस रॉकेट प्रणाली में उड़ान भरने से कुछ मिनट पहले ही तकनीकी खराबी आ गई। स्पेसएक्स के इंजीनियरों ने काउंटडाउन को कई बार रोका, लेकिन अंततः सुरक्षा कारणों से लॉन्च को टालने का फैसला करना पड़ा। यह महज एक रॉकेट परीक्षण में हुई देरी नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के महत्वाकांक्षी आर्टेमिस मून मिशन और स्पेसएक्स के भविष्य का बहुत बड़ा दांव लगा हुआ है। स्पेसएक्स ने इस टेस्ट को स्टारशिप का 12वां और अब तक का सबसे महत्वपूर्ण उड़ान परीक्षण घोषित किया था। तीसरी पीढ़ी के इस विशालकाय रॉकेट की ऊंचाई 124 मीटर से भी ज्यादा है और इसे पिछले मॉडलों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली और एडवांस बनाया गया है। लॉन्च की प्रक्रिया शुरुआत में बिल्कुल सामान्य दिख रही थी, लेकिन काउंटडाउन के दौरान अचानक इसके हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी आ गई। खुद एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि लॉन्चिंग टॉवर के आर्म को पकड़ने वाला हाइड्रोलिक पिन समय पर पीछे नहीं हट सका, जिसके चलते लॉन्च को रोकना पड़ा। इस मिशन के तहत सुपर हैवी बूस्टर को समुद्र में सुरक्षित उतारने और ऊपरी हिस्से से 20 मॉक सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में छोड़ने की योजना थी। यदि यह परीक्षण सफल रहता, तो स्टारशिप करीब 65 मिनट की उड़ान के बाद हिंद महासागर में लैंड करता। हालांकि, कंपनी अब अगली उपलब्ध समय-सीमा में इसे दोबारा लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इस तकनीकी विफलता ने नासा की धड़कनें बढ़ा दी हैं। नासा ने आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत साल 2028 तक चांद पर इंसानों की वापसी के लिए स्पेसएक्स के इसी स्टारशिप को लूनर लैंडर के रूप में चुना है। अगर स्टारशिप के परीक्षणों में इसी तरह लगातार देरी होती रही, तो अमेरिका का मून मिशन तय समय से काफी पीछे खिसक सकता है। यह स्थिति अमेरिका के लिए इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि चीन ने भी साल 2030 तक चांद पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य रखा है, जिससे दोनों देशों के बीच स्पेस रेस तेज हो गई है। इसके अतिरिक्त, स्पेसएक्स ने ठीक एक दिन पहले ही अमेरिकी रेगुलेटर्स के पास इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ से जुड़े दस्तावेज जमा किए हैं। ऐसे में स्टारशिप की यह तकनीकी खराबी निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि कंपनी की मार्केट वैल्यू काफी हद तक इस महा-रॉकेट की सफलता पर टिकी हुई है। वीरेंद्र/ईएमएस/22मई 2026