वॉशिंगटन,(ईएमएस)। भारत के महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन चंद्रयान-3 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की इस अभूतपूर्व सफलता का लोहा अब महाशक्ति अमेरिका ने भी माना है। अमेरिकी एयरोनॉटिक्स एवं एस्ट्रोनॉटिक्स संस्थान (एआईएए) ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड से नवाजा है। यह सम्मान वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एआईएए एएससीईएनडी 2026 सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया। अंतरिक्ष विज्ञान और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय व क्रांतिकारी उपलब्धियों के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार इस संस्थान का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तरफ से अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने इस गौरवशाली पुरस्कार को ग्रहण किया। बता दें कि चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र (साउथ पोल) में सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की थी। इस दुर्गम और अज्ञात क्षेत्र में कदम रखने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना था। चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे पहले दुनिया का कोई भी देश अपने मिशन को वहां सुरक्षित उतारने में कामयाब नहीं हो सका था। इस मिशन के दौरान लैंडर और रोवर से प्राप्त आंकड़ों ने भविष्य के मानव मिशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। इसके साथ ही, चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुवीय मिट्टी में कई अहम रासायनिक तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिससे भविष्य में चंद्र सतह पर मानव बस्तियों के लिए संसाधनों के उपयोग और निर्माण गतिविधियों की संभावनाएं काफी मजबूत हुई हैं। पुरस्कार समारोह के दौरान राजदूत विनय क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्पेस विजन 2047 का विशेष रूप से उल्लेख किया और भारत की दीर्घकालिक अंतरिक्ष रणनीति को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण, मानव अंतरिक्ष उड़ान और तेजी से बढ़ते वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि दोनों देशों की सरकारें, उद्योग और शोध संस्थान मिलकर भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को एक नई दिशा दे सकें। इस ऐतिहासिक पुरस्कार की स्थापना रॉकेट विज्ञान के जनक और अग्रणी वैज्ञानिक रॉबर्ट एच. गोडार्ड की स्मृति में की गई थी, जिन्होंने आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान की मजबूत नींव रखी थी। वीरेंद्र/ईएमएस/22मई 2026