राष्ट्रीय
25-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। पाठा के जंगलों में गूलर के पेड़ बड़ी मात्रा में मौजूद हैं। स्थानीय लोग इसके फल, छाल, पत्तियों और दूध का उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार गर्मी और बरसात के मौसम में गूलर के फल आसानी से जंगलों में मिल जाते हैं। लोग इन्हें तोड़कर घर लाते हैं और भोजन के रूप में सेवन करते हैं। माना जाता है कि गूलर का फल शरीर को ताकत देने के साथ कई बीमारियों में लाभ पहुंचाता है। आयुर्वेद और पारंपरिक जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि गूलर का फल एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसके सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है और बढ़ती उम्र के असर को कम करने में भी सहायता मिल सकती है। जानकार बताते हैं कि गूलर का फल पेट से जुड़ी समस्याओं में भी काफी लाभकारी माना जाता है। इसका सेवन करने से पेट दर्द, गैस, अपच और पाचन संबंधी परेशानियों में राहत मिलने की बात कही जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे प्राकृतिक औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा गूलर की छाल भी औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है। कहा जाता है कि इसकी छाल में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं। कई लोग इसकी छाल का काढ़ा बनाकर सेवन करते हैं, जिसे मधुमेह के मरीजों के लिए उपयोगी माना जाता है। गूलर के पेड़ से निकलने वाला दूध भी पारंपरिक उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इसका प्रयोग घाव भरने और त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जड़ी-बूटी या घरेलू उपचार का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी औषधीय प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। पाठा क्षेत्र के लोग आज भी जंगलों से मिलने वाले इन प्राकृतिक संसाधनों पर काफी हद तक निर्भर हैं। गूलर जैसे पेड़ न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं बल्कि ग्रामीण जीवन और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में भी अहम भूमिका निभाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इन वन संपदाओं का संरक्षण किया जाए और वैज्ञानिक तरीके से इनके गुणों पर और शोध हो, तो भविष्य में ये औषधीय पौधे स्वास्थ्य क्षेत्र में और अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं। बता दें कि पाठा क्षेत्र के जंगल अपनी प्राकृतिक संपदा, दुर्लभ वनस्पतियों और औषधीय पौधों के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में ऐसे पेड़-पौधे पाए जाते हैं, जिनका उपयोग ग्रामीण वर्षों से पारंपरिक उपचार और घरेलू औषधि के रूप में करते आ रहे हैं। सुदामा/ईएमएस 25 मई 2026